लाचार सिस्टम! बस स्टैंड पर मौत के बाद 2 घंटे पड़ा रहा शव, कुत्ते सूंघकर जाते रहे, नगरपालिका ने नहीं ली सुध

Saturday, Jan 03, 2026-06:38 PM (IST)

छतरपुर (राजेश चौरसिया): शहर के व्यस्ततम बस स्टैंड श्यामा प्रषाद मुखर्जी अन्तरजीय बस स्टैंड पर गुरुवार दोपहर मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई। यहां एक अज्ञात व्यक्ति की अचानक मौत हो गई, लेकिन करीब 2 घंटे तक शव बस स्टैंड परिसर में ही पड़ा रहा। हैरानी की बात यह रही कि इस दौरान न तो एंबुलेंस पहुंची और न ही शव वाहन की कोई व्यवस्था हो सकी। इस दौरान बस स्टैंड पर यात्रियों की आवाजाही जारी रही और शव खुले में पड़ा रहा। आसपास के जानवर कुत्ते उसे सूंघकर जाते रहे। स्थिति को देखते हुए बस स्टैंड के दुकानदारों ने इंसानियत दिखाते हुए अपने पैसे से सफेद चादर 120 रुपये में खरीदकर शव को ढका।

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मृतक की उम्र लगभग 45 से 50 वर्ष के बीच बताई जा रही है। वह पिछले काफी समय से बस स्टैंड पर घूमता रहता था और मांगकर खाता-पीता था, रात में यहीं आस-पास सो जाता था। ठंड के चलते उसके पास कपड़े वगैरह नहीं थे और संभवत: ठंड के चलते उसकी मौत हो गई है।

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ठंड से बताई जा रही मौत

रोजाना की तरह आज भी वह धूप लेने के लिए बैठा था तभी अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और वह जमीन पर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी, पुलिस तो पहुंच गई पर अन्य कोई मदद नहीं पहुंची, पुलिस कर्मियों ने मौके से नगरपालिका अधिकारियों को शव वाहन या कोई अन्य वाहन जिससे शव को अस्पताल तक ले जाया जा सके की मदद मांगी पर वह भी घंटों इंतजार के बाद नहीं मिली, जिससे हैरान परेशान होकर वे इंतज़ार करते रहे।

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TEXI वाले ने दिखाई दरियादिली मानवता

तभी एक टैक्सी वाले का दिल पसीज और उसने फ्री में शव ले जाने का बीड़ा उठाया और लोगों की मदद से शव को अपनी TEXI में ले गया। काफी देर इंतजार के बाद जब कोई सरकारी साधन नहीं मिला तो एक टैक्सी स्टैंड के एक चालक ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए बिना किसी शुल्क के अपने वाहन से शव को जिला अस्पताल पहुंचाया।

जिला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर शव को मर्चुरी में रखवाया। फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। इस घटना ने नगरपालिका, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


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meena

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