Punjab Kesari MP ads

निकाय चुनाव में किसे मिलेगा बड़ा मौका? BJP-कांग्रेस ने शुरू किया टिकट मंथन, आरक्षण ने बढ़ाया सस्पेंस

Wednesday, Sep 23, 2026-02:42 PM (IST)

Chhattisgarh Nagar Nikay Chunav 2026: छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव की सुगबुगाहट के साथ सियासी हलचल भी तेज हो गई है। दिसंबर 2026 में प्रदेश के 15 नगरीय निकायों में चुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें चार नगर निगम, पांच नगरपालिका परिषद और छह नगर पंचायत शामिल हैं। इसके अलावा नवगठित तमनार और बड़ी करेली नगर पंचायतों में भी चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। चुनाव की तारीखों का औपचारिक ऐलान अभी बाकी है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियों को गति देना शुरू कर दिया है। स्थानीय स्तर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ी है तो संभावित प्रत्याशियों ने भी पार्टी के भीतर अपनी दावेदारी मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है।

चार नगर निगमों पर खास नजर

इस चुनाव में बीरगांव, भिलाई, भिलाई-चरौदा और रिसाली नगर निगम सबसे अहम चुनावी क्षेत्रों में शामिल हैं। इनके साथ जामुल, सारंगढ़, बैकुण्ठपुर, शिवपुर-चरचा और खैरागढ़ नगरपालिका परिषद तथा प्रेमनगर, मारो, कोंटा, नरहरपुर, भैरमगढ़ और भोपालपट्टनम नगर पंचायतों में भी चुनाव प्रस्तावित हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनावी तैयारियों की समीक्षा की जा चुकी है। परिसीमन, आरक्षण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर भी काम आगे बढ़ाया जा रहा है।

भाजपा ने संगठन को चुनावी मोड में किया सक्रिय

भाजपा ने 15 नगरीय निकायों के लिए प्रभारी और सहप्रभारियों की नियुक्ति कर संगठनात्मक स्तर पर जिम्मेदारियां तय की हैं। इन पदाधिकारियों के जरिए स्थानीय संगठन, कार्यकर्ताओं और चुनावी तैयारियों के बीच समन्वय पर जोर दिया जा रहा है। अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्थानीय स्तर पर मजबूत चेहरों की पहचान और टिकट वितरण की होगी। मौजूदा जनप्रतिनिधियों के साथ पूर्व जनप्रतिनिधि, संगठन से जुड़े कार्यकर्ता और लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय नेता भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।

कांग्रेस ने भी पर्यवेक्षकों की तैनाती की

कांग्रेस ने भी चुनावी तैयारियों को धार देते हुए 15 निकायों में पर्यवेक्षक और सह-पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। चार नगर निगमों के लिए वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी की ओर से स्थानीय संगठन से फीडबैक लेने और संभावित उम्मीदवारों की स्थिति को समझने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इससे साफ है कि दोनों प्रमुख दल टिकट वितरण से पहले जमीनी समीकरणों को समझने पर जोर दे रहे हैं। हालांकि अंतिम प्रत्याशी कौन होगा, इसका फैसला पार्टी स्तर पर होने वाली आगे की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

महिला आरक्षण ने बदले टिकट के समीकरण

निकाय चुनाव में वार्ड आरक्षण भी टिकट की दौड़ को प्रभावित करने वाला बड़ा कारक बन गया है। महिला आरक्षित वार्डों में राजनीतिक दलों को ऐसे चेहरों की तलाश रहेगी जो स्थानीय स्तर पर सक्रिय हों और संगठन के साथ उनकी पकड़ मजबूत हो। रिपोर्टों के मुताबिक चार नगर निगमों में वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब प्रत्याशी चयन पर राजनीतिक दलों का फोकस बढ़ गया है।

आरक्षण के कारण कई पुराने दावेदारों के समीकरण बदल सकते हैं। जिन वार्डों में सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हुई है, वहां परिवार के दूसरे सदस्यों के नाम भी संभावित दावेदारों के रूप में सामने आ सकते हैं। हालांकि केवल राजनीतिक परिवार से जुड़ाव ही टिकट का आधार होगा, यह अभी तय नहीं है।

विकास कार्यों के साथ चुनावी गतिविधियां भी तेज

चुनाव वाले निकायों में विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं को लेकर भी गतिविधियां बढ़ी हैं। सरकार की ओर से स्थानीय स्तर पर योजनाओं और विकास कार्यों की समीक्षा की जा रही है। मंत्रियों के दौरे और संगठनात्मक कार्यक्रमों ने भी चुनावी क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियों को बढ़ाया है। फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने टिकट वितरण सबसे महत्वपूर्ण चरण होगा। कौन से पुराने चेहरे दोबारा मैदान में उतरेंगे, किन नए चेहरों को मौका मिलेगा और आरक्षण के बाद किन परिवारों के राजनीतिक समीकरण बदलेंगे - इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे। इसी वजह से छत्तीसगढ़ के नगरीय निकाय चुनाव को लेकर स्थानीय राजनीति में अभी से सस्पेंस बना हुआ है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Himansh sharma

Related News