मंत्री को मृत बताकर निकाली शवयात्रा, विधायक समेत 17 कांग्रेसियों पर FIR
Wednesday, May 13, 2026-01:57 PM (IST)
बेमेतरा: छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में गौवंशों की मौत को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया है। नवागढ़ विधानसभा क्षेत्र के झिरिया गांव में कांग्रेस नेताओं द्वारा खाद्य मंत्री दयालदास बघेल की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकालने के मामले में पुलिस ने विधायक Devendra Yadav समेत 17 कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज की है।
मामला उस समय तूल पकड़ गया जब युवा कांग्रेस नेताओं ने कथित रूप से सैकड़ों गौवंशों की मौत के विरोध में मंत्री को “मृत” दर्शाते हुए शोक सभा, मौन धारण और प्रतीकात्मक अंतिम यात्रा निकाली। प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए गए।
मंत्री के बेटे की शिकायत के बाद दर्ज हुई FIR
इस पूरे घटनाक्रम के बाद खाद्य मंत्री Dayaldas Baghel के बेटे और जिला पंचायत सदस्य अंजय उर्फ अंजू बघेल ने चंदनू थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि जीवित व्यक्ति को मृत बताकर शोक पत्र छपवाना और शव यात्रा निकालना न केवल परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला है, बल्कि धार्मिक भावनाओं को भी आहत करता है।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान मुख्य मार्ग बाधित हुआ और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई।
गौवंश मौतों पर कांग्रेस का हमला
दरअसल, झिरिया गांव में कथित रूप से 300 से अधिक गौवंशों की मौत के बाद कांग्रेस लगातार सरकार पर हमलावर है। युवा कांग्रेस महासचिव दीपक दिनकर इस मुद्दे को लेकर 9 दिनों तक अनशन पर बैठे रहे। इसी के समर्थन में कांग्रेस नेताओं ने बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, पशुपालन मंत्री Ramvichar Netam और गौ सेवा आयोग अध्यक्ष विशेश्वर पटेल को जिम्मेदार ठहराया।
हम डरने वालों में से नहीं - देवेंद्र यादव
FIR दर्ज होने के बाद विधायक देवेंद्र यादव ने सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्ता के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जाती है, लेकिन कांग्रेस पीछे हटने वाली नहीं है।
देवेंद्र यादव ने कहा, “ये लोग ताकतवर हैं, इसलिए विरोध करने वालों पर FIR कर देते हैं। लेकिन हम डरने वालों में से नहीं हैं। गौवंशों की मौत का जवाब सरकार को देना ही होगा।
राजनीति से कानून तक पहुंचा मामला
गौवंशों की मौत से शुरू हुआ यह मुद्दा अब पूरी तरह राजनीतिक और कानूनी संघर्ष में बदल चुका है। एक ओर कांग्रेस इसे जनहित और पशु संरक्षण का मुद्दा बता रही है, तो वहीं भाजपा इसे राजनीतिक मर्यादा और सामाजिक संवेदनाओं से जोड़कर देख रही है। बेमेतरा की यह घटना आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर सकती है, क्योंकि मामला अब सड़क से निकलकर थाने और कानूनी दायरे तक पहुंच चुका है।

