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झीरम कांड पर CM साय का कांग्रेस पर बड़ा हमला, बोले- ‘सबूत थे तो NIA को क्यों नहीं दिए?’

Sunday, Sep 06, 2026-08:58 PM (IST)

रायपुर (पुष्पेंद्र सिंह): मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एनआईए न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद कांग्रेस की ओर से की जा रही बयानबाजी पर पलटवार करते हुए कहा कि संबंधित प्रकरण की जांच एनआईए को उस समय सौंपी गई थी, जब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी। लगभग 13 वर्षों तक इस मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया चली, 100 से अधिक गवाहों की गवाही हुई और तमाम तथ्यों एवं साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय का निर्णय सामने आया है। न्यायालय ने 10 लोगों को दोषी ठहराया है और 16 सितंबर को उनकी सजा का निर्धारण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कांग्रेस को यह भी याद रखना चाहिए कि एनआईए किसी राज्य सरकार की नहीं, बल्कि देश की प्रमुख जांच एजेंसी है। जब यह प्रकरण एनआईए के पास गया, तब केंद्र में उनकी ही सरकार थी। इतने वर्षों तक जांच चली। यदि कांग्रेस के नेताओं के पास इस मामले से जुड़ा कोई तथ्य, प्रमाण या सबूत था तो उन्हें जांच एजेंसी के सामने रखना चाहिए था। अब न्यायालय का फैसला आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी करना केवल सवालों से बचने का प्रयास है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जब वे विपक्ष में थे, तब कहा करते थे कि सबूत जेब में लेकर घूम रहे हैं। सवाल यह है कि यदि उनके पास सबूत थे तो उन्होंने उन्हें एनआईए को क्यों नहीं सौंपा? जांच एजेंसी के सामने तथ्य रखने के लिए उनके पास पर्याप्त समय था। आरोप लगाना आसान है, लेकिन आरोपों को प्रमाणित करने के लिए तथ्य और साक्ष्य देने पड़ते हैं। न्यायिक प्रक्रिया राजनीतिक बयानों से नहीं, साक्ष्यों और तथ्यों से चलती है।

कांग्रेस में प्रभारियो के फेरबदल पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति आज भी अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति पर चल रही है। जहां कांग्रेस जाती है, वहां गुटबाजी और आपसी खींचतान शुरू हो जाती है। जनता के मुद्दों पर एकजुट होकर काम करने के बजाय कांग्रेस के नेता अपने ही दल के भीतर एक-दूसरे के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई लड़ने में व्यस्त रहते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रभार में बदलाव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब उन्हें पंजाब का प्रभारी बनाया गया था, तब वहां भी उनका विरोध सामने आया था। शायद उसी का नतीजा है कि अब उनका प्रभार प्रदेश बदल दिया गया है। यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है, लेकिन जिस प्रकार उसके अपने नेताओं के बीच लगातार विरोध और खींचतान सामने आती है, उससे कांग्रेस की राजनीतिक कार्यसंस्कृति स्पष्ट दिखाई देती है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने भीतर देखना चाहिए। एक तरफ उसके नेता न्यायिक निर्णयों पर सवाल खड़े करते हैं और दूसरी तरफ अपने ही संगठन में एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोलते रहते हैं। छत्तीसगढ़ की जनता राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और भ्रम की राजनीति को भली-भांति समझती है। जनता को बयानबाजी नहीं, तथ्य और प्रमाण चाहिए।


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Content Editor

Himansh sharma

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