कोरोना काल में निजी संस्थाओं में सेवाएं देने वालों के लिए कोर्ट ने की अहम टिप्पणी, मिलेगा ये लाभ
Saturday, Mar 21, 2026-01:46 PM (IST)
बिलासपुर: बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि कोरोना काल के दौरान निजी संस्थाओं के माध्यम से सेवाएं देने वाले अभ्यर्थी भी सरकारी भर्तियों में बोनस अंकों के हकदार होंगे। यह निर्णय स्वास्थ्य विभाग की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
क्या था पूरा मामला?
याचिकाकर्ता सुनील मरकाम ने कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि कोंडागांव के CMHO द्वारा फार्मासिस्ट पद के लिए जारी विज्ञापन में उन्हें बोनस अंकों से वंचित कर दिया गया। जबकि उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान सेवाएं दी थीं, फिर भी उनके अनुभव को मान्यता नहीं दी गई।
बोनस अंकों को लेकर विवाद
राज्य सरकार ने 7 दिसंबर 2021 को जारी आदेश में कहा था कि कोविड-19 के दौरान कम से कम 6 महीने तक सेवा देने वाले कर्मियों को तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी की भर्तियों में 10 बोनस अंक दिए जाएंगे।
याचिकाकर्ता ने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन और स्वास्थ्य केंद्र के संयुक्त कोविड कार्यक्रम में कार्य किया था, लेकिन विभाग ने उनके प्रमाण पत्र को अमान्य मानते हुए उन्हें बोनस अंक नहीं दिए।
हाईकोर्ट का सख्त रुख
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि:
- निजी संस्था के माध्यम से दी गई सेवाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
- यदि कार्य शासन के साथ संयुक्त रूप से संचालित कार्यक्रम का हिस्सा है, तो वह मान्य होगा
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को 60 दिनों के भीतर विधिवत नियुक्ति दी जाए।
फैसले का व्यापक प्रभाव
यह फैसला उन सभी अभ्यर्थियों के लिए राहत लेकर आया है जिन्होंने कोरोना काल में निजी संस्थाओं या एनजीओ के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं दी थीं। अब उन्हें भी सरकारी भर्तियों में समान अवसर और बोनस अंकों का लाभ मिलेगा।

