Punjab Kesari MP ads

BJP की बड़ी बैठक में मंथन, हारी 36 सीटों पर बढ़ेगी सक्रियता, प्रभारी मंत्रियों को सख्त निर्देश

Thursday, Aug 27, 2026-02:51 PM (IST)

रायपुरः छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता और संगठन के बीच समन्वय मजबूत करने के साथ आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति को लेकर दो दिनों तक व्यापक मंथन किया। भाजपा प्रदेश मुख्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में दूसरे दिन बुधवार देर रात करीब 11 घंटे चली मैराथन बैठक में 17 जिलों की संगठनात्मक स्थिति, प्रभारी मंत्रियों की सक्रियता, कार्यकर्ताओं से संवाद, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और कानून-व्यवस्था सहित विभिन्न विषयों की समीक्षा की गई।

बैठक में विशेष रूप से भाजपा की हारी हुई 36 विधानसभा सीटों पर संगठनात्मक सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया गया। दो दिवसीय बैठक में क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने जिलेवार समीक्षा की। संबंधित जिलों के प्रभारी मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और संगठन पदाधिकारियों से जानकारी ली गयी। समीक्षा के दौरान कुछ जिलों में सत्ता और संगठन के बीच समन्वय की कमी तथा कार्यकर्ताओं की नाराजगी का मुद्दा भी सामने आया। संगठन ने संबंधित नेताओं को अनुशासन और आपसी समन्वय के साथ काम करने के कड़े निर्देश दिए। बैठक में उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा, रामविचार नेताम, केदार कश्यप, लक्ष्मी रजवाड़े, लखन लाल देवांगन, दयालदास बघेल, गजेंद्र यादव, टंकराम वर्मा और गुरु खुशवंत साहेब मौजूद रहे।

प्रदेश के 17 जिलों के संबंध में प्रभारी मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के साथ अलग-अलग मंथन किया गया। समीक्षा के दौरान संगठन ने यह जानने का प्रयास किया कि प्रभारी मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों में कितनी नियमितता से पहुंच रहे हैं, कार्यकर्ताओं के साथ उनका संवाद कैसा है और सरकारी योजनाओं तथा विकास कार्यों की जमीनी स्थिति क्या है। कुछ जिलाध्यक्षों ने प्रभारी मंत्रियों की कार्यप्रणाली और कार्यकर्ताओं को पर्याप्त समय नहीं मिलने का विषय भी उठाया। सूत्रों के मुताबिक राजस्व मंत्री वर्मा के प्रभार वाले सारंगढ़, धमतरी और नारायणपुर जिलों की समीक्षा के दौरान उनकी सक्रियता को लेकर सवाल उठे। बैठक में तीनों जिलों के अध्यक्ष, जिला प्रभारी और विधायक मौजूद थे। जामवाल और पवन साय ने जिलाध्यक्षों से पूछा कि प्रभारी मंत्री नियमित दौरे पर आते हैं या नहीं। इस पर बताया गया कि मंत्री बहुत कम आते हैं और कभी आते भी हैं तो भाजपा कार्यालय नहीं पहुंचते। कार्यकर्ता उनसे मिलना चाहते हैं, लेकिन उनके पास समय नहीं रहता।

बताया गया कि इस दौरान वर्मा ने संबंधित जिलों में चल रहे विकास कार्यों का ब्योरा देना शुरू किया और जवाब देते समय बार-बार विधायक अजय चंद्राकर की ओर देखा। इस पर जामवाल ने कहा, 'मंत्री आप हैं या विधायक जी? यदि ऐसा ही चलता रहा तो आपका प्रभार बदलना पड़ेगा।' इस टिप्पणी पर बैठक में ठहाके भी लगे। बताया जा रहा है कि वर्मा को संगठन की ओर से पहले भी चेतावनी मिल चुकी है। वहीं दो दिवसीय समीक्षा में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के कामकाज को लेकर कोई शिकायत सामने नहीं आई। यादव के पास राजनांदगांव जिले का प्रभार है। बैठक में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह मौजूद नहीं थे। जिले के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रभारी मंत्री नियमित दौरे करते हैं और विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट भी मिल रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल के पास बलौदाबाजार और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का प्रभार है। दोनों जिलों की छह विधानसभा सीटों में से केवल दो भाजपा के पास हैं। इसके बावजूद संगठन पदाधिकारियों ने उनके नियमित दौरों की प्रशंसा की। दोनों जिलों में डीएमएफ की बैठकें भी नियमित होने की जानकारी दी गई। बैठक में भाजपा की हारी हुई 36 विधानसभा सीटों को लेकर विशेष रणनीतिक चर्चा हुई। इन क्षेत्रों के प्रभारी मंत्रियों को अपनी सक्रियता बढ़ाने, नियमित दौरे करने, स्थानीय कार्यकर्ताओं से लगातार संवाद बनाए रखने और आगामी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। संगठन का जोर उन क्षेत्रों में पार्टी का जनाधार मजबूत करने पर है, जहां पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। इन सीटों को लेकर निगम-मंडलों के अध्यक्षों को भी एक-एक विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है। संगठन उनसे नियमित रिपोर्ट ले रहा है।

प्रभारी मंत्रियों से भी संबंधित विधानसभा क्षेत्रों की राजनीतिक और संगठनात्मक स्थिति के आधार पर आगे की रणनीति मांगी गई है। मैराथन समीक्षा में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। संगठन ने मंत्रियों से पूछा कि सरकारी योजनाओं का लाभ जिले के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं। कुछ जिलाध्यक्षों ने बताया कि योजनाओं से संबंधित छोटे-छोटे काम भी अटक रहे हैं। कुछ जिलों से कानून-व्यवस्था को लेकर शिकायतें भी सामने आईं। बैठक में गृह मंत्री शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने बस्तर में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी दी।

दोनों मंत्रियों ने नक्सलवाद समाप्त होने के बाद क्षेत्र के विकास के लिए सरकार की कार्ययोजना और वर्तमान में किए जा रहे कार्यों से संगठन नेतृत्व को अवगत कराया। बैठक में जिलों के भीतर पाटर्ी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच नाराजगी के मामलों पर भी चर्चा की गई। वरिष्ठ नेताओं ने संबंधित जिलों की स्थिति की जानकारी लेते हुए आपसी संवाद के माध्यम से मतभेद और नाराजगी दूर करने पर जोर दिया।

संगठन नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि सरकार की योजनाओं को प्रभावी तरीके से आम लोगों तक पहुंचाने के साथ जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता और सत्ता-संगठन के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है। दो दिनों तक चली इस कवायद को भाजपा की आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। समीक्षा के जरिए एक तरफ प्रभारी मंत्रियों के जिलों में कामकाज और संगठन से उनके समन्वय का आकलन किया गया, वहीं दूसरी तरफ हारी हुई 36 विधानसभा सीटों पर पार्टी की स्थिति मजबूत करने के लिए आगे की कार्ययोजना पर ध्यान दिया गया। 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Vandana Khosla