MP कांग्रेस में अंदरूनी घमासान, दिग्विजय के साथ इस दिग्गज नेता के व्यवहार पर कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा
Saturday, Jun 20, 2026-06:01 PM (IST)
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में नेताओं के बीच चल रही खींचतान अब संगठन के निचले स्तर तक पहुंचती दिखाई दे रही है। हालिया घटनाक्रम और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर तेज हो गए हैं। वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी से जुड़े मामलों को लेकर कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। इसी क्रम में कांग्रेस कार्यकर्ता सीताराम यादव का एक बयान चर्चा में है, जिसमें उन्होंने दिग्विजय सिंह के समर्थन में अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ नेताओं के सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया। यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश की राजनीति में दिग्विजय सिंह का लंबा अनुभव और कद रहा है, ऐसे में संगठन के भीतर उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी को सभी वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलना चाहिए ताकि संगठनात्मक मजबूती बनी रहे।
दो वीडियो से उपजा विवाद, बढ़ी राजनीतिक चर्चाएं
कांग्रेस के भीतर जारी इस बहस के बीच हाल ही में सामने आए दो अलग-अलग वीडियो ने स्थिति को और अधिक चर्चित बना दिया है। राज्यसभा चुनाव से जुड़े मामले में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्त होने के बाद पार्टी द्वारा चलाए जा रहे विरोध प्रदर्शनों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ये वीडियो सामने आए। पहले वीडियो में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह और हरीश चौधरी के बीच हुई बातचीत को लेकर चर्चाएं तेज हुईं। वहीं दूसरे वीडियो में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, दिग्विजय सिंह और हरीश चौधरी एक मंच पर दिखाई देते हैं। इस दौरान मंच पर कुर्सी व्यवस्था को लेकर हुई हल्की-सी हलचल और उसके बाद दिग्विजय सिंह का किनारे जाकर बैठना भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।
एकजुटता के प्रयासों के बीच संगठनात्मक सवाल
कांग्रेस इन दिनों राज्यभर में नामांकन निरस्तीकरण के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रही है और पार्टी नेतृत्व भाजपा व निर्वाचन आयोग के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। हालांकि इसी बीच सामने आए वीडियो और कार्यकर्ताओं की सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं ने संगठन के भीतर समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय से सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस के लिए यह समय संगठनात्मक एकजुटता का है, लेकिन सार्वजनिक स्तर पर दिख रही असहमति पार्टी की रणनीति को प्रभावित कर सकती है। वहीं दूसरी ओर भाजपा इन घटनाक्रमों को लेकर कांग्रेस पर लगातार हमलावर है और इसे संगठनात्मक कमजोरी के रूप में पेश कर रही है। कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रही यह खींचतान आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है।

