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चीनी महंगी होनी चाहिए’ दिग्गज मंत्री के बयान पर भड़के लोग, बोले- हर किसी को डायबिटीज नहीं, महंगाई रोकिए

Friday, Aug 28, 2026-02:01 PM (IST)

भोपाल। मध्य प्रदेश में शक्कर की बढ़ती कीमतों के बीच मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान ने सियासी बहस को नया मुद्दा दे दिया है। विजयवर्गीय ने कहा कि चीनी महंगी होनी चाहिए और 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को चीनी नहीं मिलनी चाहिए। मंत्री के इस बयान के बाद अब आम लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य को लेकर सलाह देना अलग बात है, लेकिन बढ़ती महंगाई को लेकर आम आदमी की परेशानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हर व्यक्ति को मधुमेह नहीं है और बड़ी संख्या में परिवार आज भी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए सीमित बजट में घर चलाते हैं।

‘हर किसी को डायबिटीज नहीं है, महंगाई का दर्द भी समझना होगा’

मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए लोगों का कहना है कि चीनी कम खाना स्वास्थ्य के लिए अच्छी सलाह हो सकती है, लेकिन इससे बाजार में बढ़ी कीमतों का सवाल खत्म नहीं हो जाता। उनका कहना है कि दूध, चाय, नाश्ता और त्योहारों से जुड़ी मिठाइयों सहित कई रोजमर्रा की चीजों में चीनी का इस्तेमाल होता है। लोगों के मुताबिक, अगर किसी जरूरी खाद्य वस्तु की कीमत लगातार बढ़ रही है तो उसका समाधान उपभोक्ताओं को कम इस्तेमाल करने की सलाह देना नहीं, बल्कि कीमतों पर प्रभावी नियंत्रण करना होना चाहिए।

त्योहारों के बीच बढ़ी कीमतों ने बढ़ाई चिंता

त्योहारों के सीजन से पहले चीनी के दाम बढ़ने से घरेलू बजट पर असर पड़ने की चिंता भी बढ़ी है। ऐसे समय में जब परिवारों का खर्च पहले ही कई मोर्चों पर बढ़ा हुआ है, चीनी जैसी रोजमर्रा की वस्तु महंगी होने को लेकर लोगों में नाराजगी दिखाई दे रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 26 अगस्त को देश में चीनी का औसत खुदरा भाव करीब 65 रुपये प्रति किलो पहुंच गया, जो एक दिन पहले लगभग 64 रुपये प्रति किलो था। यानी खुदरा बाजार में कीमतों में फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई।

विपक्ष ने भी सरकार पर साधा निशाना

मंत्री के बयान को लेकर कांग्रेस ने भी बीजेपी सरकार पर हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि महंगाई से परेशान आम जनता के बीच इस तरह की टिप्पणियां लोगों की समस्याओं का मजाक उड़ाने जैसी हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार को चीनी की कीमतों और महंगाई के वास्तविक कारणों पर जवाब देना चाहिए, न कि लोगों को कम चीनी खाने की सलाह देकर मुद्दे से हटना चाहिए।

इथेनॉल नीति भी बनी बहस का हिस्सा

चीनी की कीमतों को लेकर चल रही बहस में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का मुद्दा भी सामने आया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि गन्ने और चीनी उद्योग से जुड़ी नीतियों का असर बाजार कीमतों पर पड़ रहा है। हालांकि सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है और कीमतों में बढ़ोतरी के लिए बाजार एवं उद्योग से जुड़े कारणों को जिम्मेदार बताती है।

फिलहाल इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, क्या महंगाई से परेशान उपभोक्ता को कम इस्तेमाल की सलाह देना पर्याप्त है, या सरकार और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी जरूरी वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने की भी है? आम लोगों की प्रतिक्रिया साफ है कि स्वास्थ्य संबंधी सलाह अपनी जगह है, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों का समाधान भी उतना ही जरूरी है।


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Content Editor

Himansh sharma