तकनीक तभी सार्थक जब वह मानव हित में हो, हम AI को सुशासन और सबके विकास के लिए अपनाएंगे : CM मोहन
Friday, Feb 20, 2026-04:56 PM (IST)
भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नई तकनीक तभी सार्थक है जब वह मानवता के हित में कारगर सिद्ध हो। नई दिल्ली के भारत मंडपम् में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 में उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को सुशासन, सामाजिक समरसता और सर्वांगीण विकास के साधन के रूप में अपनाना होगा।
एआई: पारदर्शिता, सुशासन और विकास का इंजन
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत डिजिटल परिवर्तन के दौर में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में एआई कृषि, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और प्रशासन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। एआई से निर्णय प्रक्रिया तेज होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक अवसर भी है और जिम्मेदारी भी। इसका उपयोग भारतीय मानवीय मूल्यों के संरक्षण के साथ होना चाहिए। तकनीकी श्रेष्ठता के साथ नैतिकता, पारदर्शिता और समावेशिता को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
मध्यप्रदेश स्टेट एआई मिशन और डेटा सेंटर
डॉ. यादव ने घोषणा की कि प्रदेश में शीघ्र ही “मध्यप्रदेश स्टेट एआई मिशन” लॉन्च किया जाएगा। इसके अंतर्गत साझा जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, बड़ा डेटा सेंटर और एआई गवर्नेंस सैंडबॉक्स स्थापित किया जाएगा। भोपाल और इंदौर में एआई फोकस्ड एक्सेलरेटर शुरू किए जाएंगे।
राज्य सरकार इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट पॉलिसी में एआई आधारित तकनीकों को शामिल कर रही है, जिससे टेक्सटाइल, फार्मा, माइनिंग और ऑटो सेक्टर में उत्पादन क्षमता 15-20 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है। साथ ही ग्रीन डेटा सेंटर और सोलर आधारित ऊर्जा मॉडल को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में एआई की भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि प्रधान राज्य है। एआई के माध्यम से फसलों की बीमारियों की समय पर पहचान, सिंचाई प्रबंधन और बहुफसलीय खेती को बढ़ावा मिलेगा। किसानों की आय बढ़ाने के लिए बागवानी, जैविक खेती और प्रोसेसिंग यूनिट में भी एआई सहायक होगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई से सुदूर अंचलों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाई जा सकेंगी। सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियों की पहचान और उपचार में भी तकनीक उपयोगी होगी। शिक्षा के क्षेत्र में नई शिक्षा नीति-2020 के तहत नवाचारों के साथ एआई को बढ़ावा दिया जाएगा।
5 स्तंभों पर आधारित एआई ईको सिस्टम
मध्यप्रदेश में एआई का संपूर्ण ईको सिस्टम विकसित किया जाएगा, जिसके पांच प्रमुख स्तंभ होंगे—
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कम्प्यूटर इंफ्रास्ट्रक्चर: साझा जीपीयू और डेटा सेंटर
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टैलेंट डेवलपमेंट: कॉलेजों में एआई शिक्षा और इंडस्ट्री सर्टिफिकेशन
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स्टार्टअप सपोर्ट: फंडिंग, मेंटरशिप और इन्क्यूबेशन
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इंडस्ट्री एडॉप्शन: विभिन्न सेक्टर में एआई उपयोग को प्रोत्साहन
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रिसर्च एंड इनोवेशन: इंडस्ट्री-लिंक्ड रिसर्च सेंटर
सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 500 से अधिक एआई स्टार्टअप के माध्यम से 50 हजार से ज्यादा रोजगार सृजित करना है।
वैश्विक कंपनियों से साझेदारी
समिट के दौरान मुख्यमंत्री ने एनवीडिया, सर्वम एआई, गूगल प्ले, सबमर टेक्नोलॉजीज और अन्य वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधियों से वन-टू-वन बैठकें कीं। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप, जीपीयू सब्सिडी, सॉवरेन एआई मॉडल और डेटा सेंटर अपग्रेडेशन जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
मध्यप्रदेश पवेलियन में आईआईटी इंदौर सहित कई नवप्रवर्तनशील संस्थानों और स्टार्टअप्स ने एआई आधारित समाधान प्रस्तुत किए। नगरीय प्रशासन, स्वास्थ्य मिशन और पर्यटन विभाग ने भी अपने एआई अनुप्रयोगों का प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि एआई भविष्य में मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था का बड़ा विकास इंजन बनेगा और राज्य को वैश्विक एआई परिदृश्य में अग्रणी बनाएगा।
गूगल पेवेलियन का किया आवलोकन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गूगल पेवेलियन का अवलोकन किया। उन्होंने कंट्री डायरेक्टर आशीष वाटल एवं कंपनी के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ उच्च-स्तरीय संवाद किया। एआई, संवर्धित वास्तविकता (एआर) और आभासी वास्तविकता (वीआर) सहित मानचित्र-आधारित प्रौद्योगिकियों के माध्यम से मध्यप्रदेश में पर्यटन नवाचार को सुदृढ़ करने की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
म.प्र. पेवेलियन का किया भ्रमण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश पवेलियन का भ्रमण कर अवलोकन किया। पेवेलियन में विभिन्न नवप्रवर्तनशील उद्यमों एवं प्रतिष्ठित संस्थानों के अत्याधुनिक एआई समाधान का अवलोकन किया। इनमें कॉमनिफाई वेंचर्स, रिमोट फिज़ियोस, आस्कगैलोर डिजिटल इंडिया प्रा. लि., ग्रेडिन एआई, ट्रायोसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज़ प्रा. लि., आरएसईएनएल एआई फिल्म्स, क्वासी इंटेलिजेंस प्रा. लि., यंगोवेटर, नोवोसएज (एग्रीदूत), एनयूएआईजी इन्फोटेक प्रा. लि., प्लांटिक्स, ज़ैंगोह, आईआईटी इंदौर दृष्टि साइबर-भौतिक प्रणाली फाउंडेशन और आईआईटी इंदौर शामिल रहे। इन संस्थानों द्वारा संचार प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवाएं, कृषि नवाचार, औद्योगिक स्वचालन, रोबोटिक्स, सृजनात्मक एआई तथा संप्रभु शासन मंचों से संबंधित उन्नत एआई आधारित समाधान प्रस्तुत किए गए। इनमें राज्य की तकनीकी क्षमता और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावी रूप से प्रदर्शित किया।
म.प्र. पेवेलियन में शासकीय विभागों ने भी अपने एआई अनुप्रयोगों का प्रदर्शन किया, जिनमें नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय द्वारा एमपी शहरी लॉकर, भौगोलिक सूचना प्रणाली गरुड़ प्रयोगशाला, एआई सक्षम वित्तीय प्रवाह प्रबंधन प्रणाली और ई-नगर पालिका एकीकरण; पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा एआई आधारित जिला प्रदर्शन विश्लेषण प्रणाली,राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा तपेदिक जोखिम पूर्वानुमान, एआई आधारित जाँच एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य सहायता और मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा होलोग्राफिक एवं सजीव डिजिटल पर्यटन अनुभव शामिल रहे।
प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एम. सेलवेंद्रम, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव इलैया राजा टी. एवं मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला भी उपस्थित थे।

