500 करोड़ की कॉलोनी के लिए खेतों के बीच सरकारी रोड, खरीद-फरोख्त का जारी है खेल

10/22/2020 6:55:06 PM

जबलपुर(विवेक तिवारी): आस पास कोई मकान नहीं है चारों तरफ खेत ही खेत है लेकिन फिर भी सड़क निकली है सोचिए किस लिए ये सड़क हो सकती है? जाहिर सी बात है किसान तो खेतों के बीच सड़क निकाल नहीं सकते। तो आखिर इसका राज क्या है। यह सड़क सार्वजनिक और सरकारी है जो सिर्फ एक कॉलोनी के लिए बनाई गई है जिसका उपयोग डेढ़ किलोमीटर में कोई नहीं करेगा। जी हां यहां से डेढ़ किलोमीटर दूर कॉलोनी तक लोग जरूर जा सकेंगे ऐसा होता तो नहीं लेकिन जब कॉलोनी की बात हो और वह कॉलोनी भी 500 करोड़ की हो तो सब कुछ संभव हो सकता है। जी हां 500 करोड़ की एमएच रेसिडेंसी के लिए कानून की धज्जियां उड़ाने वाले बिल्डर हर्ष पटेल और मंगल पटेल और साथ ही प्रदीप गोटिया का एक बड़ा कारनामा फिर निकल कर सामने आया है।

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फिर एक जमीन मालिक ने एसडीएम कोर्ट में लगाया केस
पीड़ित शैलेश जॉर्ज की जमीन पर हेरफेर करके सड़क निकालने वाले बिल्डर ने अब एक और धोखाधड़ी की है इस बार उन्होंने एक फर्म के एक पार्टनर को अपने जाल में फंसाया और सड़क में बाधा बन रही जमीन को जन भागीदारी के तहत सरकार को सौंपने के लिए तय कर लिया लेकिन यहां पर धोखाधड़ी के बीच बिल्डर की पोल खुल गई क्योंकि जिस जमीन को उन्होंने जनभागीदारी के लिए दिया वो जमीन एक फर्म की थी और फर्म के पार्टनर ने बिना अपने दूसरे साझेदारों को बताएं यह जमीन विक्रय कर दी। लिहाजा जब दूसरे साझेदार अभितेंद्र राय जो कि दमोह के निवासी हैं उनको भनक लगी तो उन्होंने अनुविभागीय अधिकारी अधारताल के समक्ष है वाद प्रस्तुत किया है। यहां बेहद चौंकाने वाली बात यह है कि 500 करोड़ की कॉलोनी बन रही है जिसके लिए किलोमीटर दूर की सड़क सिर्फ इसलिए जन भागीदारी के तहत बनाई गई कि कॉलोनी तक पहुंच सके अब जिस तरह से भव्य एसोसिएट के पार्टनर ने अपील एसडीएम कोर्ट में लगाई है। उससे बिल्डर का दिमाग लगाने लगा है कि इस सड़क पर कोई भी रोक ना लगे। आपको बता दें कि भव्या एसोसिएट द्वारा संदीप श्रीवास्तव से कृषि भूमि मौजा लक्ष्मीपुर में खसरा 36/2 दो था उसमें से तीन पार्टनर थे और किसी भी जमीन को बेचने के पहले तीनों की सहमति होना जरूरी होता है लेकिन यहां पर राय से जानकारी छुपाते हुए सड़क के लिए एक हिस्सा दे दिया गया जिससे आप एसडीएम कोर्ट में वाद दाखिल किया गया है।

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नहीं मिला जनता को लाभ फिर भी जन भागीदारी
जनभागीदारी के प्रावधान के तहत जो डेढ़ किलोमीटर की सड़क यहां पर तैयार की गई उसे जनता का कोई भी लेना देना नहीं है यह पूरी तरह से प्राइवेट प्रोजेक्ट है जिसमें रसूखदार बिल्डर ने कब्जा जमाया क्योंकि एमएच रेजीडेंसी तक जाने के लिए डेढ़ किलोमीटर तक का सफर तय करना होगा लिहाजा जनभागीदारी से सड़क बनवाई जा रही है इस सड़क में जितने भी बाधाएं आई सबको बिल्डर खरीदा जा रहा है। इसके पहले आपको बता दें कि शैलेश जॉर्ज के प्रकरण में भी तहसीलदार मुनव्वर खान ने नक्शे में ही परिवर्तित करते हुए जनभागीदारी की जमीन पर रोड निकालने की अनुमति दे दी अब यह सवाल उठा कि आखिर समस्त बाधाओं को अलग करना है तो किसको किसको खरीदना होगा ऐसे में जितने भी लोग आ रहे हैं उनको खरीदा जा रहा है। अब यहां पर 8 वर्ग मीटर की संपत्ति धारा 173 mplr कोड  के प्रावधानों के तहत एसोसिएट के एक पार्टनर ने दे दी ऐसे में सवाल ये उठता है कि जब जनता का कहीं पर यहां हित ही नजर नहीं आ रहा तो कानूनी के लिए सड़क क्यों दी जा रही है

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खेत तक जाने के लिए कैसे बनेगी पक्की सड़क
भारत कृषि प्रधान देश है लेकिन आप सोचिए कि किसी के खेत तक जाने के लिए पक्की सड़क बनती है शायद आपका जवाब होगा नहीं लेकिन जब पैसे मिल जाएं तो खेती की जमीन पर भी जनभागीदारी की सड़क बन जाती है। लक्ष्मीपुर की कृषि भूमि पर भी कुछ ऐसा ही हुआ यहां के आसपास के जो भूमि मालिक थे उन्होंने स्वेच्छा से जमीन दे दी उनका तर्क आप सुनेंगे तो चौंक जाएंगे यह तर्क दिया गया कि हम जिस खेत में जाते हैं वहां के रास्ते के लिए हमने सड़क जनभागीदारी के लिए दे दी है। एक आवेदन तहसीलदार अधारताल को दिया गया और कहा गया कि हम सभी लोगों ने मौजा लक्ष्मीपुर में अपनी भूमियों तक आने-जाने के लिए आपसी सहयोग से रास्ता बनाया हुआ है जिसका उपयोग हम लोग एवं अन्य सभी लोग सार्वजनिक रूप से कर रहे हैं हम लोग चाहते हैं कि उक्त रास्ते को राजस्व अभिलेख में सार्वजनिक शासकीय रास्ते के रूप में दर्ज कर दिया जाए। इस हेतू हम सभी भूमिस्वामी रास्ते में उपयोग की गई भूमि का हक शासन के पक्ष में देने हेतू सहमत हैं।

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खेतों के बीच में भूमि देने वाले लोग कौन 
ओलंपस रियल एस्टेट 
अशोक पलाहा 
भाव्या एसोसिएट द्वारा पार्टनर हरीश होतवानी
योगेंद्र पटेल खेमचंद पटैल 
संजय पटैल सुकेश  पटेल सुजीत पटेल
गुरमीत सिंह  रविंदर सिंह 
यह वे लोग थे जिन्होंने खेतों के बीच से अपनी जमीन दे दी इनका तर्क था कि हमको वहां तक जाने के लिए सड़क की जरूरत है लेकिन हकीकत तो यह है कि यह जमीन एमएच रेसिडेंसी के लिए सड़क के लिए दी गई ना कि खुद के जाने के लिए और यह पूरा खेल खेला है बिल्डर प्रदीप गोटिया, मंगल पटैल, हर्ष पटैल ने।

 

 

 

 


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