रायपुर साहित्य उत्सव में ‘भारत का बौद्धिक विमर्श’ सत्र, राम माधव के विचारों से गूंजा वैचारिक मंच
Saturday, Jan 24, 2026-07:24 PM (IST)
रायपुर (पुष्पेंद्र सिंह): रायपुर साहित्य उत्सव ने इस बार साहित्यिक गरिमा के साथ-साथ गहन वैचारिक विमर्श का मंच बनकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई। उत्सव के अंतर्गत आयोजित ‘भारत का बौद्धिक विमर्श’ विषयक विशेष सत्र विचार, तर्क और संवाद का केंद्र बना, जिसने बुद्धिजीवियों से लेकर युवाओं तक को गंभीर आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया।
इस सत्र के मुख्य वक्ता प्रख्यात विचारक एवं लेखक श्री राम माधव रहे। अपने सशक्त और संतुलित वक्तव्य में उन्होंने कहा कि किसी भी जीवंत राष्ट्र की असली शक्ति उसका बौद्धिक विमर्श होता है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान, वैश्विक राजनीति और समकालीन सामाजिक यथार्थ से जोड़ते हुए बताया कि भारत का चिंतन मौलिक होने के साथ-साथ तार्किक और प्रासंगिक भी है। राम माधव ने उस धारणा को भी सिरे से खारिज किया, जिसमें बौद्धिकता को केवल पश्चिमी सोच तक सीमित मान लिया जाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय चिंतन परंपरा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ आधुनिक वैश्विक चुनौतियों को समझने और समाधान देने की क्षमता रखती है।
सत्र के दौरान श्रोताओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। प्रश्नोत्तर और संवाद के माध्यम से यह चर्चा परंपरा और भविष्य के संतुलन का जीवंत उदाहरण बन गई। सत्र के अंत में यह स्पष्ट संदेश सामने आया कि असहमति भी तभी सार्थक होती है, जब वह तर्क, मर्यादा और संवाद के दायरे में हो। रायपुर साहित्य उत्सव का यह सत्र केवल एक चर्चा नहीं, बल्कि सकारात्मक, रचनात्मक और आत्मबोध से जुड़े वैचारिक विमर्श की नई संस्कृति का प्रतीक बनकर उभरा। इस आयोजन ने यह भी प्रमाणित किया कि छत्तीसगढ़ की धरती लोक संस्कृति के साथ-साथ उच्चस्तरीय बौद्धिक मंथन की भी सशक्त भूमि है।

