मीनाक्षी नटराजन मामले में चुनाव आयोग की चुप्पी, 4 घंटे बाद भी फैसला नहीं, कांग्रेस का धरना जारी
Wednesday, Jun 10, 2026-05:05 PM (IST)
भोपाल। मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने का मामला अब राजनीतिक और संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है। कांग्रेस इस फैसले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए लगातार विरोध दर्ज करा रही है, जबकि पार्टी की नजर अब निर्वाचन आयोग के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है।बुधवार को कांग्रेस के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से मुलाकात कर रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) के फैसले को चुनौती दी। प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे। आयोग के समक्ष कांग्रेस ने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन जिस आधार पर खारिज किया गया, उसका चुनावी कानून में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने आयोग के सामने पक्ष रखते हुए कहा कि नटराजन के खिलाफ कोई ऐसा आपराधिक मामला लंबित नहीं था, जिसकी जानकारी शपथ पत्र में देना अनिवार्य हो। उनके अनुसार हैदराबाद की अदालत से केवल एक नोटिस जारी हुआ था, जिसमें आगे सुनवाई शुरू करने को लेकर जवाब मांगा गया था। इसे लंबित आपराधिक प्रकरण मानना कानून की गलत व्याख्या है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के मुताबिक, निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को दो घंटे के भीतर निर्णय लेने का आश्वासन दिया था। हालांकि चार घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आयोग की ओर से कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया, जिससे राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं।
इधर राजधानी भोपाल में भी कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। पार्टी कार्यकर्ता मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय पहुंचे, लेकिन कार्यालय का मुख्य द्वार बंद मिलने पर उन्होंने कार्यालय के बाहर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र और चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने वाला बताया है।
गौरतलब है कि मंगलवार को चुनाव अधिकारियों ने शपथ पत्र में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया था। भाजपा का आरोप है कि उन्होंने हैदराबाद की अदालत में लंबित एक मामले की जानकारी हलफनामे में छिपाई। वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए लोकतंत्र की हत्या" और राज्यसभा सीट की चोरी करार दे रही है।
अब पूरे मामले में सभी की निगाहें निर्वाचन आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। यह निर्णय न केवल मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी का भविष्य तय करेगा, बल्कि मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव की राजनीतिक दिशा भी प्रभावित कर सकता है।

