MP के ग्रेजुएट किसान ने उगाए पीले तरबूज, प्रयोग ने बना दिया लखपति

5/15/2021 9:46:56 PM

बैतूल(रामकिशोर पवार): मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में एक किसान ने अपने खेतों में पीले रंग तरबूज उगाया है। जी हां बैतूल जिला मुख्यालय पर पीले तरबूजों के साथ युवा उद्यानिकी किसान श्याम पवार जो इन दिनों पीले तरबूजों की खेती बाड़ी को लेकर सुर्खियों में छाए हुए है। आम तौर पर तरबूजों के बारे में कहा जाता है कि धरती पर सबसे पहले पीले रंग का ही तरबूज ही आया था। अफ्रीका से शुरू हुई तरबूज की खेती मेड इन चाइना हो गई। चीन में भी बड़े पैमाने पर तरबूजों के विभिन्न रंगो में उत्पादन की प्रक्रिया जारी है। 21 वी सदी में पीले का रंग का तरबूज कोई कोरी कल्पना नहीं है। दावा है कि पीले तरबूज के आगे लाल तरबूज की मिठास भी फीकी है। पीले तरबूजों के बारे में जानकार व्यक्ति डॉ राजेंद्र राजन (निर्देशक सी आई एच एस ) कहते है कि मूलत: तरबूज पीले ही रंग का ही होता है।
 



वही दूसरी ओर उद्यानिकी विभाग एम एच सैफी (सहायक निदेशक मध्य प्रदेश बागवानी विभाग) कहते है कि फल का रंग उसके पिगमेंट की वजह से तय होता है। पिगमेंट की वजह से ही उसके जनरेटिक बीज की क्वालिटी बदल जाती है। पीले रंग के तरबूज में बीटा कैरोटीन नामक पिगमेंट होता है जिसकी वजह से उसकी क्वालिटी बदल जाती है। लाल रंग के तरबूजों में लाइकोपीन नामक पिगमेंट होता है। बैतूल के श्याम को भा गई पीले तरबूज की खेती रिकार्ड उत्पादन के बाद , मिलने लगे प्रशंसा पत्र बैतूल जिले के मूल निवासी श्याम पिता रामदयाल कोटले हाल मुकाम शिवाजी वार्ड बैतूल के रहले वाले ने ग्राम पंचायत मंडई खुर्द में अपनी 20 एकड़ जमीन में से साढ़े पांच एकड़ में बागवानी की खेती बाड़ी का काम रहे है। बीसीए विषय में स्नातक शिक्षा प्राप्त श्याम ने सरकारी नौकरी करने के बदले अपने पुश्तैनी खेती बाड़ी के काम में हाथ बटाना उचित समझा। ग्राम रोंढा के मूल निवासी श्याम दो भाई एवं दो बहने है। परिवार में मंझले श्याम ने बताया कि इंटरनेट एवं सोशल मीडिया के माध्यम से ऑनलाइन जानकारी प्राप्त की।



उद्यानिकी विभाग बैतूल जिले की ओर से उन्हें मल्चिंग और ड्रिप अनुदान के माध्यम से मिली सरकार मदद ने पीले तरबूज की ओर उसका ध्यान खींचा। लगभग 45 टन दो एकड़ में तरबूज का उत्पादन किया। पीले रंग के तरबूज का स्वाद यूं तो पायनेप्पल की तरह शहद जैसी मिठास के समान होता है। कई प्रकार की बीमारियों से तरबूज ही बचाता चला आ रहा है। तरबूजों में हरे तरबूज तो आपने मंडी में देखें होंगे। लेकिन इस बार पीले तरबूज मार्केट में इस कदर आये हुए है कि लोग इसे अधिक खरीद रहे है। जून महीने की गर्मी अप्रैल महीने में पड़ने से तरबूज जैसे फलों की बिक्री बढ़ गई है। खासकर गर्मी की प्यास बुझाने वाला तरबूज बाजार में इतना आ गया है कि जगह - जगह ढेर लग गए है। इन तरबूजों में पीले रंग के तरबूज लोगों को काफी आकर्षित कर रहे हैं। तरबूज की यह नई किस्म बैतूल जिला मुख्यालय पर लोगों को पहली बार देखने को मिल रही हैं। इसके दाम हरे रंग के तरबूज के समान होने पर लोग इसे बड़े चाव से खरीद रहे है। बाजार में तरबूज की कई किस्में है जो दस रुपये से लेकर 25 रुपये प्रति किलो तक अलग - अलग रेटों में बिक रहा है। बैतूल जिले में सर्वाधिक गर्मी के कारण बढ़ी तरबूज की आवक आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयासरत उद्यानिकी विभाग इस बार अधिक बढ़ने के साथ इस बार तरबूज की बिक्री भी बढ़ गई है।


गर्मी से राहत के लिए तरबूज सर्वोत्तम उपाय माना जाता है। लेकिन अब इसकी नई किस्मों से अधिक मुनाफे ने इसकी लोकप्रियता और बढ़ा दी है। क्षेत्र में किसान इनका उत्पादन कर फायदा उठा रहे हैं। एक किस्म ऊपर से पीली व अंदर से सामान्य है। वहीं दूसरी सामान्य दिखाई देने वाली किस्म अंदर से पीली व स्वाद में पाइनएप्पल जैसी है। शरीर में पानी की कमी को दूर करने वाली इन दोनों किस्मों के तरबूजों से 70 दिनों में किसान ने चार गुना मुनाफा कमाया है। अगर आपको ऑर्गेनिक खेती के तरबूज का स्वाद चखना है तो मंडई गांव की ओर रुख कीजिए क्योंकि वहां के किसान श्याम पंवार ने ही रंग बिरंगे तरबूज पैदा कर एक नया प्रयोग किया है. किसान श्याम पंवार ने अपने खेत के एक हिस्से में बिना किसी रासायनिक और कीटनाशक दवाइयों के ये रंग बिरंगे तरबूज उगाए हैं। इसकी चर्चा दूर - दूर तक हो रही है और तरबूजों को देखने के लिए खेत में अन्य किसान भी आ रहे है। गांव मण्डई खुर्द जो कि बैतूल जनपद की एक ग्राम पंचायत भी है।



चार किस्म के हैं
तरबूज श्याम ने अपने खेत में तरबूज की चार किस्में उगाई हैं जिसमें अनमोल, विशाल, प्राची एवं सरस्वती मुख्य किस्में है। अनमोल नाम के तरबूज का रंग बाहर से हरा होता है लेकिन अंदर से लेमन रंग का होता है। इसका स्वाद भी शहद जैसा मीठा होता है। इसी तरह विशाल नाम के तरबूज की किस्म में बाहर से पीला रंग होता है तो अंदर से लाल सुर्ख और बिल्कुल मीठा जो खाने में अति स्वादिष्ट होता है। वहीं प्राची किस्म में बेबी तरबूज होता है जो काफी अधिक मात्रा में बोया जाता है और चौथी किस्म होती है सरस्वती जो कि आम तौर पर बाजार में पाया जा सकता है। लेकिन अनमोल और विशाल की किस्म एक नई किस्म है। अनमोल व विशाल किस्म के तरबूज की बैतूल - इटारसी - होशंगाबाद - भोपाल में ज्यादा डिमांड है। हम वहीं तरबूजों को बेच रहे हैं जिनकी कीमत भी अच्छी मिल जाती है।  

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This news is Content Writer meena