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इस सरकारी योजना से कट गए 1.61 लाख महिलाओं के नाम, 67 हजार खातों में नहीं पहुंची राशि

Thursday, Sep 03, 2026-02:33 PM (IST)

रायपुर : छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना शुरू होने के करीब दो साल बाद पहली बार सभी हितग्राहियों की ई-केवाईसी कराए जाने के दौरान 1.61 लाख महिलाओं के नाम योजना से हटाए गए हैं। इनमें 1.33 लाख महिलाओं की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 27,700 हितग्राही अपात्र पाए गए और 912 महिलाओं ने स्वेच्छा से योजना का लाभ छोड़ दिया है। योजना की शुरुआत एक मार्च 2024 को हुई थी और उस समय करीब 70 लाख महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1000 रुपए की राशि भेजी जानी शुरू हुई थी। ई-केवाईसी प्रक्रिया में सामने आए मामलों के बाद हितग्राहियों की संख्या में कमी आई है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के मुताबिक ई-केवाईसी नहीं होने के कारण 67 हजार महिलाओं की राशि जुलाई से रोक दी गई है। इनमें 17 हजार महिलाओं के फिंगर प्रिंट और रेटिना का आधार से मिलान नहीं हो पा रहा है। ऐसे हितग्राहियों को किस प्रक्रिया के आधार पर राशि दी जाए, इस संबंध में विभाग ने शासन को पत्र भेजा है। वहीं, करीब 50 हजार महिलाएं ई-केवाईसी कराने नहीं पहुंचीं। विभागीय टीमों ने उनके पते पर जाकर सत्यापन किया, लेकिन वे वहां नहीं मिलीं।

मिली जानकारी के अनुसार इनमें से कई महिलाएं कुछ महीने पहले दूसरे जिले या प्रदेश में स्थानांतरित हो चुकी हैं। यदि वे उसी क्षेत्र में पहुंचकर ई-केवाईसी कराती हैं, जहां से उन्होंने आवेदन किया था, तो उनकी राशि जारी की जा सकेगी। सरकार ने ई-केवाईसी के लिए एक महीने का अतिरिक्त समय दिया है। पिछले वर्ष खाद्य विभाग ने राशनकाडर् धारकों की ई-केवाईसी कराई थी। महिला एवं बाल विकास विभाग ने अपने हितग्राहियों का डेटा खाद्य विभाग के रिकॉडर् से मिलान कराया। इसमें करीब 4.18 लाख महिलाओं की ई-केवाईसी नहीं मिली, जिसके बाद विभाग ने अलग से प्रक्रिया शुरू की। नवंबर 2025 में 3.93 लाख महिलाओं की ई-केवाईसी पूरी हुई। इसके बाद 25 हजार महिलाएं शेष रहने पर विभाग ने अन्य बचे हुए हितग्राहियों की भी ई-केवाईसी कराने का निर्णय लिया। सत्यापन में 27,700 लोग अपात्र मिले। इनमें 15 हजार ऐसे मामले थे, जिनमें दो आवेदन किए गए थे। ऐसे हितग्राहियों का एक-एक आवेदन अपात्र किया गया। इस प्रक्रिया में अब तक छह करोड़ रुपए समायोजित किए जा चुके हैं। इसके अलावा 12,700 लोग सरकारी नौकरी या आयकरदाता होने के कारण अपात्र पाए गए। इनसे अब तक चार करोड़ रुपए की वसूली की जा चुकी है। ई-केवाईसी के दौरान विभाग के सामने 35 ऐसे मामले भी आए, जिनमें समान नामों के कारण रिकॉर्ड में गड़बड़ी हुई।

अधिकारियों ने जीवित महिला को मृत दर्ज कर दिया, जबकि मृत महिला के खाते में योजना की राशि भेजी जाती रही। जांच में सामने आया कि दोनों महिलाओं और उनके पतियों के नाम एक जैसे थे। अब मृत महिला के खाते में भेजी गई राशि की वसूली कर जीवित महिला के खाते में राशि भेजी जा रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने तीन अप्रैल 2026 से कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से ई-केवाईसी की प्रक्रिया शुरू की थी। इसकी अंतिम तारीख 31 अगस्त निर्धारित थी। कुल 68.6 लाख महिलाओं की ई-केवाईसी की जानी थी, जिनमें 67.4 लाख की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और करीब 1.17 लाख महिलाओं की ई-केवाईसी शेष है। सेंटर संचालकों के अनुसार शेष हितग्राहियों में करीब 10 हजार महिलाओं की मृत्यु हो चुकी है, 50 हजार महिलाएं दिए गए पते पर नहीं मिल रही हैं और 17 हजार के फिंगर प्रिंट का मिलान नहीं हो रहा है। इस स्थिति में करीब 40 हजार महिलाओं के और ई-केवाईसी आंकड़े में जुड़ने की संभावना है। हितग्राही महिला की मृत्यु होने पर संबंधित जिले के अधिकारियों को उसका नाम हटाने की सूचना संचालनालय को देनी होती है। समय पर जानकारी नहीं पहुंचने के कारण हजारों मृत हितग्राहियों के खातों में भी राशि जाती रही। जिन खातों से राशि निकाल ली गई, वहां वसूली में कठिनाई आ रही है, जबकि बैंक खातों में राशि उपलब्ध होने पर उसे वापस लिया जा रहा है। ऐसे मामलों में अब तक 3.25 करोड़ रुपए की वसूली की जा चुकी है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि, 'ई-केवाईसी की अंतिम तारीख 31 अगस्त थी लेकिन इसे एक महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है। जिनके फिंगर आधार से मैच नहीं कर रहे है, वे माताएं चिंता न करें उन्हें भी राशि मिलेगी। शासन स्तर पर विचार किया जा रहा है। जहां से बहनों ने दो साल पहले फार्म भरा था, वे वहीं जाकर केवाईसी करवा लें तो उनकी राशि भी जारी हो जाएगी।' 


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Content Writer

meena

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