50 साल से बिना नींद के जीवन! रिटायर्ड ज्वाइंट कलेक्टर बने मेडिकल साइंस के लिए जीवित रहस्य
Saturday, Jan 17, 2026-07:41 PM (IST)
रीवा। (गोविंद सिंह): इंसानी शरीर की सीमाओं को लेकर मेडिकल साइंस जहां नींद को जीवन की अनिवार्य आवश्यकता मानता है, वहीं मध्य प्रदेश के रीवा जिले से सामने आई एक चौंकाने वाली कहानी ने वैज्ञानिकों और डॉक्टरों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
रीवा निवासी 75 वर्षीय रिटायर्ड ज्वाइंट कलेक्टर मोहन लाल द्विवेदी पिछले 50 वर्षों से बिना सोए जीवन जीने का दावा करते हैं। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय से नींद न लेने के बावजूद वे न सिर्फ पूरी तरह स्वस्थ हैं, बल्कि आज भी एक सामान्य, सक्रिय और संतुलित जीवन जी रहे हैं।
नींद के बिना भी सामान्य दिनचर्या
मोहन लाल द्विवेदी का कहना है कि उन्हें कभी नींद नहीं आती, लेकिन इसका उनके शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा।
वे रोजमर्रा के सभी काम पढ़ना ,लिखना सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेना पारिवारिक जिम्मेदारियाँ निभाना बिल्कुल सामान्य तरीके से करते हैं।
डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के लिए रिसर्च का विषय
नींद विशेषज्ञ और मेडिकल साइंस से जुड़े डॉक्टर इस मामले को अत्यंत दुर्लभ और असाधारण मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक विज्ञान यह मानता आया है कि नींद के बिना जीवन संभव नहीं है, लेकिन मोहन लाल द्विवेदी का मामला इस धारणा को चुनौती देता है।
डॉक्टरों के अनुसार -
यह केस मानव शरीर की असाधारण जैविक क्षमता (Extraordinary Biological Adaptation) को दर्शाता है। इस पर गहन वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है।”
इंसानी शरीर की सीमाओं पर सवाल
वैज्ञानिक मानते हैं कि अगर यह दावा पूरी तरह सत्य है, तो यह नींद, दिमाग और शरीर की कार्यप्रणाली को लेकर नई समझ विकसित कर सकता है। यह मामला भविष्य में मेडिकल रिसर्च और न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में नई दिशा दे सकता है।
सामाजिक जीवन में भी पूरी तरह सक्रिय
मोहन लाल द्विवेदी न सिर्फ शारीरिक रूप से स्वस्थ हैं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक जीवन में भी पूरी तरह सक्रिय हैं। उनकी जीवनशैली आज लोगों के लिए कौतूहल, आश्चर्य और चर्चा का विषय बनी हुई है।
एक जीवित पहेली
50 वर्षों से बिना नींद के जीवन जीने वाला यह व्यक्ति आज मेडिकल साइंस के लिए एक जीवित रहस्य बन चुका है। क्या इंसानी शरीर सच में नींद के बिना भी काम कर सकता है? इस सवाल का जवाब शायद आने वाले वैज्ञानिक शोध देंगे।

