Punjab Kesari MP ads

बंदूक की जगह हाथ में ''आशीर्वाद का दिया'' अबूझमाड़ में हिंसा के अंधेरे से जनसेवा और आत्मनिर्भरता की नई भोर

Friday, Sep 18, 2026-06:43 PM (IST)

रायपुर (पुष्पेंद्र सिंह) : छत्तीसगढ़ का नारायणपुर जिला और विशेष रूप से अबूझमाड़ का दुर्गम क्षेत्र लंबे समय तक भय, हिंसा और नक्सली साए की भयावहता झेलता रहा। कभी जिन हाथों ने भटकाव की राह पर बंदूकें उठाई थीं, वे अब समाज निर्माण और आत्मनिर्भरता का एक नया अध्याय लिख रहे हैं। छत्तीसगढ़ शासन की 'नक्सलवादी आत्मसमर्पण, पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति-2025' ने अबूझमाड़ के युवाओं को केवल हथियार छोड़ने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उनके लिए सम्मानजनक जीवन, परिवार से पुनर्मिलन और आर्थिक स्वावलंबन के नए द्वार खोल दिए हैं। आज नारायणपुर में पुनर्वास की यह प्रक्रिया केवल कागजी दावों तक सीमित न रहकर ज़मीनी स्तर पर एक जीवंत सामाजिक क्रांति के रूप में दिखाई दे रही है।

PunjabKesari

हिंसा के अंधियारे को पीछे छोड़ मुख्यधारा में लौटे ये आत्मसमर्पित व्यक्ति अब केवल अपनी आजीविका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जनसेवा और सामाजिक आयोजनों में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत आयोजित 'आशीर्वाद का दिया' कार्यक्रम में जब इन्होंने एक साथ दीप प्रज्ज्वलित किए, तो वह केवल एक आयोजन भर नहीं था, बल्कि अबूझमाड़ के दूरस्थ अंचलों में शांति, सद्भावना और सामाजिक स्वीकार्यता का एक सशक्त संदेश था।

PunjabKesari

इस अनूठी सहभागिता ने समाज में आपसी विश्वास को मजबूत करते हुए 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय संकल्प को नई ऊर्जा दी है। यह सुखद बदलाव इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब संवेदनशील नीतियां सही दिशा में आजीविका, सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ती हैं, तो परिवर्तन स्वयं चलकर आता है और हिंसा का अंधेरा छंटकर स्थायी शांति की नई भोर में बदल जाता है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

meena

Related News