मंच पर कसीदे, कमरे में मंत्रणा… मोहन यादव को लेकर बड़ा संदेश दे गए शाह! जानिए अंदर की पूरी कहानी
Saturday, Oct 03, 2026-06:41 PM (IST)
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में शनिवार का दिन सिर्फ केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के दौरे के तौर पर नहीं देखा गया। शाह का दौरा डेयरी और सहकारिता के एजेंडे से आगे बढ़कर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की राजनीतिक स्थिति और प्रदेश भाजपा के भीतर चल रही चर्चाओं के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। शाह के भोपाल पहुंचने से लेकर भेल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन तक मुख्यमंत्री मोहन यादव लगातार उनके साथ प्रमुखता से नजर आए। एयरपोर्ट पर स्वागत से लेकर सार्वजनिक मंच तक दोनों नेताओं की साथ मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा। आधिकारिक तौर पर दौरे का केंद्र डेयरी, पशुपालन और सहकारिता रहा, लेकिन राजनीतिक नजरिए से मुख्यमंत्री की मौजूदगी और शाह के साथ उनकी सार्वजनिक केमिस्ट्री भी चर्चा का विषय बनी।
50 लाख लीटर का लक्ष्य और शाह का साथ
भोपाल के गोपालक सम्मेलन में 'श्वेत क्रांति 2.0' को आगे बढ़ाने का रोडमैप सामने रखा गया। मध्यप्रदेश ने दुग्ध उत्पादन बढ़ाकर प्रतिदिन 50 लाख लीटर के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही। शाह ने डेयरी क्षेत्र में मध्यप्रदेश के प्रयासों की सराहना की और केंद्र के सहयोग का भरोसा दिया। सम्मेलन में उज्जैन के 255 करोड़ रुपये के डेयरी प्लांट समेत कई परियोजनाओं की शुरुआत भी हुई। यही वह हिस्सा है, जिसे राजनीतिक तौर पर भी पढ़ा जा रहा है। शाह जिस सहकारिता और डेयरी मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, मध्यप्रदेश का डेयरी विस्तार उसी बड़े एजेंडे से जुड़ता है। केंद्र और राज्य का यह साझा कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां सरकारी योजना, सहकारी संस्थाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था—तीनों को एक साथ जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है।

सार्वजनिक मंच पर तारीफ, अंदरूनी राजनीति पर चर्चा
शाह के दौरे से पहले और उसके दौरान प्रदेश भाजपा की अंदरूनी राजनीति को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं चलती रहीं। खासकर 30 सितंबर को मध्यप्रदेश के नए भाजपा प्रभारी बिप्लब कुमार देब की पहली कोर ग्रुप बैठक के बाद संगठन और सरकार से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक चर्चाओं ने जोर पकड़ा था। देब ने अपने शुरुआती संगठनात्मक संदेश में नेताओं और कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने पर जोर दिया था। इसी बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी रही कि कुछ नेता मुख्यमंत्री सरकार से जुड़े नकारात्मक पहलुओं को केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन उन नेताओं को राजनीतिक स्पेस नहीं मिला..
ताज होटल का अध्याय सबसे ज्यादा चर्चा में क्यों रहा?
शाह के कार्यक्रम में होटल ताज लेकफ्रंट पर मध्यप्रदेश सरकार और केंद्र से जुड़े लंबित विषयों पर बैठक के लिए करीब दो घंटे का समय निर्धारित था। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार यह बैठक दोपहर 2:15 से शाम 4:15 बजे तक प्रस्तावित थी।
हालांकि, बाद में कुछ मीडिया रिपोर्टों में इस बैठक और प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस के रद्द होने की जानकारी सामने आई। रद्द होने की वजह स्पष्ट नहीं बताई गई। ऐसे में इस बैठक को लेकर राजनीतिक निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक स्थिति को आधार बनाना जरूरी है।
फिर भी, इससे पहले जो राजनीतिक चर्चाएं थीं, वे अपने आप में दिलचस्प हैं। सवाल यह था कि क्या शाह के सामने प्रदेश के कुछ नेता सरकार से जुड़े अपने मुद्दे और शिकायतें सीधे रख पाएंगे? अगर ऐसी कोई मुलाकात या राजनीतिक प्रस्तुति नहीं हो पाई, तो इसे लेकर अलग-अलग व्याख्याएं होना स्वाभाविक है।
एक राजनीतिक व्याख्या यह हो सकती है कि सरकार से जुड़ी शिकायतें संगठनात्मक स्तर पर मौजूद हो सकती हैं, लेकिन सार्वजनिक मंच पर केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के काम और सरकार के प्रमुख एजेंडे को ही प्रमुखता दी।
मोहन यादव के लिए राजनीतिक संदेश?
शाह का सार्वजनिक मंच से मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार के डेयरी और सहकारिता क्षेत्र के काम को आगे बढ़ाना निश्चित रूप से ध्यान देने वाला घटनाक्रम है। खासकर तब, जब मध्यप्रदेश का डेयरी मॉडल शाह के राष्ट्रीय सहकारिता एजेंडे से सीधे जुड़ रहा है।
इसे मुख्यमंत्री के पक्ष में किसी औपचारिक राजनीतिक प्रमाणपत्र के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि भोपाल दौरे में सार्वजनिक रूप से जो तस्वीर सामने आई, उसमें शाह और मोहन यादव साथ-साथ दिखाई दिए, राज्य के डेयरी मॉडल को केंद्र का समर्थन मिला और 50 लाख लीटर प्रतिदिन के लक्ष्य को लेकर सहयोग का संदेश दिया गया।
यानी भोपाल दौरे का राजनीतिक पाठ सिर्फ इतना नहीं है कि अमित शाह आए और डेयरी की योजनाओं की घोषणा हुई। इसके समानांतर एक दूसरी तस्वीर भी बनी—केंद्र का सहकारिता एजेंडा, मध्यप्रदेश की डेयरी नीति और मुख्यमंत्री मोहन यादव का नेतृत्व एक ही मंच पर दिखाई दिया। अब इस तस्वीर का असर आने वाले दिनों में संगठन और सरकार के बीच की राजनीति में किस तरह दिखाई देता है, यह देखने वाली बात होगी।

