शारदा पीठ के शंकराचार्य बोले - प्रशासन ने ब्राह्मण बच्चों के साथ किया बड़ा अन्याय, अविमुक्तेश्वरानंद को तीनों शंकराचार्यों का समर्थन

Monday, Jan 26, 2026-09:50 AM (IST)

जबलपुर: नर्मदा जन्मोत्सव के पावन अवसर पर द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज जबलपुर पहुंचे। यहां उन्होंने नर्मदा प्राकट्योत्सव से जुड़े विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता की और मीडिया से बातचीत के दौरान प्रयागराज में चल रहे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर स्पष्ट और कड़े शब्दों में अपना पक्ष रखा।

नर्मदा दर्शन मात्र से होता है कल्याण

नर्मदा प्राकट्योत्सव पर जबलपुर आने के अनुभव साझा करते हुए शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने एक संस्कृत श्लोक का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यमुना में सात बार स्नान, गंगा में एक बार स्नान और नर्मदा के दर्शन मात्र से मनुष्य का कल्याण हो जाता है। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि नर्मदा के दर्शन कर स्वयं को धन्य अनुभव कर रहा हूं। यहां आयोजित सभी कार्यक्रम अत्यंत सुंदर और अनुशासित रहे।

शंकराचार्य से प्रमाण मांगना प्रशासन का अधिकार नहीं

प्रयागराज में प्रशासन द्वारा शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगे जाने पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी। शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि प्रशासन को यह तय करने का कोई अधिकार नहीं है कि शंकराचार्य कौन है और कौन नहीं। शंकराचार्य वही होता है, जो शंकराचार्य का शिष्य होता है।उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके गुरु ने केवल दो लोगों को संन्यास प्रदान किया था—एक वे स्वयं और दूसरे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। इसके अतिरिक्त शृंगेरी पीठ के शंकराचार्य द्वारा अविमुक्तेश्वरानंद का विधिवत अभिषेक किया गया है। यह उत्तराधिकार की शांकर परंपरा है, जिसमें किसी भी प्रकार की बाहरी दखलंदाजी स्वीकार्य नहीं है।

नकली शंकराचार्यों पर रोक लगे

प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किए जाने पर शंकराचार्य ने कहा कि यदि प्रशासन शंकराचार्यों की पहचान करने लगेगा, तो पहले उन तथाकथित नकली शंकराचार्यों पर कार्रवाई करनी चाहिए, जिन्हें मेलों और आयोजनों में स्थान दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग असली शंकराचार्यों का महत्व कम करने के लिए मनगढ़ंत उपाधियां बांट रहे हैं, जो शांकर परंपरा के लिए गंभीर खतरा है।

बच्चों पर लाठीचार्ज निंदनीय

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के धरने और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि प्रशासन से बड़ी भूल हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्दोष और छोटे-छोटे ब्राह्मण बच्चों पर निर्दयता से लाठियां चलाई गईं, जो अत्यंत निंदनीय है।

उन्होंने कहा कि इस पूरे विवाद का समाधान केवल क्षमा याचना से संभव है। यदि प्रशासन स्वयं जाकर क्षमा मांग ले और शंकराचार्य को स्नान करने दे, तो विवाद तत्काल समाप्त हो सकता है।

राजा का धर्म प्रजा का कल्याण

अपने वक्तव्य में उन्होंने शासन-प्रशासन को धर्म का स्मरण कराते हुए कहा कि राजा का कर्तव्य प्रजा को धर्म के मार्ग पर ले जाना है। जिस प्रकार पिता पुत्र के हित के लिए होता है और गुरु शिष्य के कल्याण के लिए, उसी प्रकार राजा का धर्म प्रजा के हित में कार्य करना है। यदि राजा धार्मिक होगा, तो प्रजा स्वतः धार्मिक मार्ग पर अग्रसर होगी।शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती के इस बयान के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को तीनों पीठों के शंकराचार्यों का समर्थन और अधिक स्पष्ट हो गया है, जिससे यह मामला अब धार्मिक परंपरा और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बड़े प्रश्न के रूप में सामने आ रहा है।


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Content Editor

Himansh sharma

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