BJP के कद्दावर नेता और मंत्री को मिल सकती बड़ी जिम्मेदारी, दिल्ली पहुंची लिस्ट! हो सकता है बड़ा ऐलान, देखें नाम
Friday, May 29, 2026-09:10 PM (IST)
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज है। राज्यसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे-वैसे भारतीय जनता पार्टी के भीतर संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाओं का दौर भी गर्म होता जा रहा है। सबसे ज्यादा जिस नाम की चर्चा राजनीतिक गलियारों में सुनाई दे रही है, वह है प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय।
सूत्रों की मानें तो भाजपा की प्रदेश इकाई ने संभावित नामों की सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेज दी है और अब अंतिम निर्णय दिल्ली में होना है। पार्टी इस बार सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधते हुए सामान्य वर्ग से एक प्रभावशाली चेहरे को राज्यसभा भेजने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसी रणनीति के केंद्र में कैलाश विजयवर्गीय का नाम तेजी से उभरकर सामने आया है।
दरअसल, विजयवर्गीय केवल चुनाव जीतने वाले नेता नहीं माने जाते, बल्कि संगठन की नब्ज पकड़ने वाले रणनीतिकार के रूप में उनकी अलग पहचान रही है। इंदौर की नगर राजनीति से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके विजयवर्गीय लंबे समय से केंद्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका की इच्छा रखते हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपनी यह मंशा पार्टी नेतृत्व के सामने भी स्पष्ट कर दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा उन्हें राज्यसभा भेजती है, तो यह केवल एक सीट भरने का फैसला नहीं होगा, बल्कि 2028 के विधानसभा चुनाव और उससे पहले राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की रणनीतिक तैयारियों का संकेत भी माना जाएगा। संगठन पर मजबूत पकड़, बंगाल जैसे चुनौतीपूर्ण राज्यों में काम करने का अनुभव और आक्रामक राजनीतिक शैली विजयवर्गीय को भाजपा के उन नेताओं में शामिल करती है, जिन्हें पार्टी समय-समय पर बड़ी जिम्मेदारियों के लिए आगे बढ़ाती रही है।
मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होना है। भाजपा के खाते की दो सीटों पर फिलहाल केंद्रीय राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी सांसद हैं, जबकि कांग्रेस की सीट पर दिग्विजय सिंह का कार्यकाल चर्चा में बना हुआ है। ऐसे में भाजपा की सूची केवल नामों का चयन नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक संदेशों का दस्तावेज भी मानी जा रही है।
अब नजरें दिल्ली पर टिकी हैं… क्योंकि अंतिम मुहर वहीं लगनी है।

