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अब मंडियों में बदलेगा खेल! किसानों को मिलने वाला है बड़ा फायदा… जानें क्या है नया नियम

Saturday, Apr 04, 2026-04:50 PM (IST)

भोपाल। मध्यप्रदेश के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। औषधीय खेती करने वाले किसानों को अब अपनी उपज बेचने के लिए दूर-दराज की मंडियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। राज्य सरकार ने प्रदेश की सभी कृषि उपज मंडियों में 15 औषधीय फसलों की खरीद की व्यवस्था शुरू करने का फैसला लिया है।

अब तक इन फसलों की बिक्री के लिए किसानों को खासतौर पर मंदसौर और नीमच जैसे क्षेत्रों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद वे अपने नजदीकी मंडी में ही उपज बेच सकेंगे। इससे समय और लागत दोनों की बचत होगी।

किसानों को मिलेगा बेहतर दाम

प्रदेश देश में औषधीय खेती के क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है। करीब 46 हजार हेक्टेयर में औषधीय फसलों का उत्पादन हो रहा है। अश्वगंधा, सफेद मूसली और गिलोय जैसी पारंपरिक फसलों के साथ अब किसान सहजन, अकरकरा, चिया बीज और नागरमोथा जैसी नई फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं। सरकार के इस फैसले से इन फसलों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिलने की उम्मीद है।

इन फसलों को किया गया शामिल

सरकार ने 15 से अधिक औषधीय फसलों को कृषि औषधीय उपज की श्रेणी में शामिल करने का निर्णय लिया है। इनमें चिया बीज, अकरकरा, हिंगोट, जामुन, कंठकारी, भृंगराज, टेसू फूल, बबूल फली, एलोवेरा पत्ती, गोखरू, नागरमोथा, निर्गुणी, सहजन पत्ती, हारसिंगार पत्ती और सनाय पत्ती जैसी फसलें शामिल हैं।

कानून में होगा संशोधन

इस व्यवस्था को लागू करने के लिए कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। संशोधन के बाद इन फसलों की खरीद प्रदेश की सभी मंडियों में वैध रूप से की जा सकेगी।

6 हफ्तों में मांगे गए सुझाव

सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है और आम जनता से 6 सप्ताह के भीतर सुझाव मांगे हैं। प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम निर्णय लागू किया जाएगा।नई व्यवस्था लागू होने के बाद गेहूं और चना जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ औषधीय फसलों की भी मंडियों में नियमित खरीदी शुरू हो जाएगी, जिससे किसानों की आय बढ़ने के साथ औषधीय खेती को भी मजबूती मिलेगी।


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Content Editor

Himansh sharma

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