LPG Crisis: MP में बदले सिलेंडर डिस्ट्रीब्यूशन नियम! सरकार ने शुरू किया कोटा सिस्टम, जानें डिटेल में
Tuesday, Mar 24, 2026-01:28 PM (IST)
भोपाल: मध्य प्रदेश में गैस सिलेंडरों की किल्लत के बीच सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए नई वितरण व्यवस्था लागू कर दी है। मध्य प्रदेश सरकार का यह फैसला ‘जरूरत के हिसाब से कोटा’ तय करने पर आधारित है, ताकि जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता मिल सके और आम लोगों को परेशानी न हो।
घरेलू उपभोक्ताओं को पूरी राहत
सरकार ने साफ कर दिया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तरह 100% गैस सप्लाई मिलती रहेगी। यानी घरों में खाना बनाने के लिए किसी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी। यह फैसला आम जनता के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता
निर्देशों के अनुसार, शिक्षा और चिकित्सा संस्थानों को जिले में उपलब्ध कमर्शियल गैस स्टॉक का 30% हिस्सा दिया जाएगा। बीके चंदेल (उप सचिव, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग) ने सभी कलेक्टरों को यह आदेश जारी किया है, ताकि इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सेवाएं प्रभावित न हों।
किसे कितना मिलेगा गैस कोटा?
सरकार ने अलग-अलग सेक्टर के लिए स्पष्ट प्रतिशत तय कर दिए हैं:
- सुरक्षा एजेंसियां, पुलिस, रेलवे, एयरपोर्ट आदि: 35%
- होटल सेक्टर: 9%
- रेस्टोरेंट और केटरिंग: 9%
- ढाबा और स्ट्रीट फूड वेंडर: 7%
- फार्मा, फूड प्रोसेसिंग जैसे उद्योग: 5%
- अन्य उद्योग: 5%
इससे साफ है कि कमर्शियल सेक्टर को अब सीमित संसाधनों में काम चलाना होगा।
सख्ती और निरीक्षण बढ़ेगा
सरकार ने चेतावनी दी है कि जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जिला प्रशासन नियमित निरीक्षण करेगा। इसके साथ ही संस्थानों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत अपनाने की भी सलाह दी गई है।
ऑनलाइन बुकिंग और रिकॉर्ड रखना जरूरी
सिलेंडरों की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए भी सख्त उपाय किए हैं। इसके तहत पिछले तीन महीनों की खपत के आधार पर ही सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही ऑनलाइन बुकिंग और रिकॉर्ड रखना अनिवार्य किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित प्रतिशत से अधिक सिलेंडर का आवंटन नहीं किया जाएगा।
व्यापार पर पड़ रहा असर
राजधानी भोपाल सहित कई शहरों में कमर्शियल गैस की कमी अभी भी बनी हुई है। पिछले दो हफ्तों से हालात सामान्य नहीं हुए हैं, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों का कारोबार प्रभावित हो रहा है और उनमें नाराजगी बढ़ती जा रही है। कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम जरूरी सेवाओं को बचाने के लिए है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों और कमर्शियल सेक्टर पर पड़ रहा है।

