185 सरपंचों के आंदोलन के बीच जनपद CEO का तबादला, जिला पंचायत CEO पर बढ़ा दबाव
Thursday, Jul 02, 2026-04:05 PM (IST)
मोहला-मानपुर। छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर जिले में पंचायत प्रशासन को लेकर उठे विवाद ने अब बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक मोड़ ले लिया है। निर्माण कार्यों के भुगतान में कथित कमीशनखोरी, फाइलों को लंबित रखने और पंचायत प्रतिनिधियों की अनदेखी जैसे गंभीर आरोपों के बीच मोहला जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) प्रांजल प्रजापति का बस्तर तबादला कर दिया गया है। सरकार ने इस तबादले को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है, लेकिन जिले में इसे सरपंचों के आंदोलन के बाद हुई पहली बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
करीब एक सप्ताह से मोहला, मानपुर और अंबागढ़ चौकी विकासखंड के 185 सरपंच जिला पंचायत प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। उनका आरोप है कि पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों के भुगतान के बदले कथित रूप से कमीशन मांगा जा रहा है, भुगतान में महीनों की देरी हो रही है और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही। इसी मुद्दे को लेकर सरपंच संघ ने जिला पंचायत CEO को हटाने की मांग करते हुए सामूहिक इस्तीफे तक की चेतावनी दे डाली।
इसी बीच जनपद CEO के तबादले वाले दिन जिला सरपंच संघ का 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल रायपुर पहुंचा। प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री और शासन के वरिष्ठ अधिकारियों तक अपनी शिकायतें पहुंचाने का प्रयास किया। सूत्रों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने पंचायत विभाग में कथित अनियमितताओं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जुड़े कई बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी दी। हालांकि सरकार ने तबादले और इन शिकायतों के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं की है, लेकिन घटनाक्रमों के समय ने चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने भी जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कलेक्टर ने दो अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर सहित 12 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति को तीन अलग-अलग टीमों में बांटा गया है, जो मोहला, मानपुर और अंबागढ़ चौकी जनपद पंचायतों में जाकर सरपंचों द्वारा लगाए गए आरोपों, भुगतान प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की विस्तृत जांच करेगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
हालांकि जनपद CEO का तबादला हो चुका है, लेकिन सरपंच संघ अपनी मूल मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि जिला पंचायत CEO के खिलाफ लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए। ऐसे में अब पूरे मामले की दिशा जांच समिति की रिपोर्ट और शासन के अगले फैसले पर निर्भर करेगी। फिलहाल मोहला-मानपुर की पंचायत राजनीति में प्रशासनिक हलचल चरम पर है और आने वाले दिनों में इस विवाद के और गहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

