भोपाल से बाहर कैबिनेट! CM मोहन यादव का बड़ा मास्टरस्ट्रोक, गांव-गांव से लिए जा रहे करोड़ों के फैसले, बदल रहा MP
Tuesday, Mar 24, 2026-08:04 PM (IST)
भोपाल: मध्यप्रदेश में शासन व्यवस्था को जमीनी स्तर तक ले जाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा प्रशासनिक नवाचार किया है। अब मंत्रि-परिषद की बैठकें सिर्फ राजधानी भोपाल तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि प्रदेश के अलग-अलग अंचलों में आयोजित की जा रही हैं।
पिछले सवा दो वर्षों में जबलपुर, दमोह, खरगौन, नर्मदापुरम्, छतरपुर और बड़वानी जैसे जिलों में कैबिनेट बैठकों का आयोजन किया गया है। इन बैठकों में विकास और जनकल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, जिनका सीधा लाभ स्थानीय जनता को मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सामान्य कैबिनेट के साथ-साथ कृषि कैबिनेट को भी प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित करने का निर्णय लिया है। वहीं, उज्जैन में सिंहस्थ कैबिनेट आयोजित करने की भी योजना है।
इस पहल की शुरुआत जबलपुर से की गई थी, जहां 3 जनवरी 2024 को पहली बैठक आयोजित हुई। इसके बाद दमोह के सिंग्रामपुर, खरगौन के महेश्वर, नर्मदापुरम के पचमढ़ी, छतरपुर के खजुराहो और इंदौर के राजवाड़ा जैसे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व वाले स्थानों पर भी कैबिनेट बैठकों का आयोजन किया गया। इन बैठकों में सिंचाई परियोजनाओं, कृषि योजनाओं, स्वास्थ्य सुविधाओं, औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। हाल ही में बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में आयोजित कृषि कैबिनेट में किसानों के लिए 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं को स्वीकृति दी गई।
सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल प्रशासनिक पहुंच मजबूत हुई है, बल्कि स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित हुआ है। अब प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों से भी जनकल्याण के महत्वपूर्ण फैसले लिए जा रहे हैं, जिससे विकास की प्रक्रिया को नई गति मिली है।

