सतना में शोक की लहर,धारकुंडी आश्रम संस्थापक संत स्वामी परमहंस सच्चिदानंद 101 साल की उम्र में ब्रह्मलीन, एक युग का अंत
Sunday, Feb 08, 2026-04:54 PM (IST)
सतना (अनुपम सिंह): सतना जिले से इस वक्त एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। प्रसिद्ध धारकुंडी आश्रम के संस्थापक और महान संत पूज्य स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज ब्रह्मलीन हो गए हैं। उन्होंने 101 वर्ष की आयु में मुंबई के बदलापुर में अंतिम सांस ली। उनके निधन से पूरे आध्यात्मिक जगत में शोक की लहर है।

सतना जिले के धारकुंडी आश्रम से जुड़ी एक युग का अंत हो गया है। आश्रम के संस्थापक पूज्य स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज 101 वर्ष की आयु में ब्रह्मलीन हो गए। उन्होंने मुंबई के बदलापुर में देह त्याग किया। स्वामी जी के निधन की खबर मिलते ही लाखों भक्तों, शिष्यों और संत समाज के साथ साथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए गहरा शोक व्याप्त किया।
बताया जा रहा है कि स्वामी जी का पार्थिव शरीर बदलापुर से कड़ी सुरक्षा व्यस्था के बीच आज धारकुंडी आश्रम पहुंचा,स्वामी जी का एक दर्शन पाने के लिए सड़को पर भक्तों का जन सैलाब उमड़ पड़ा , धारकुंडी आश्रम में स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी के पार्थिव देह का वैदिक विधि-विधान के साथ उन्हें समाधि दी जाएगी। इस दौरान सीएम मोहन यादव, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल, राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी स्थानीय नेता समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहेंगे ।

पूज्य स्वामी जी का 101वां जन्मोत्सव 1 जनवरी 2025 को धारकुंडी आश्रम में हजारों भक्तों की मौजूदगी में भव्य रूप से मनाया गया था। उस समय स्वास्थ्य कारणों से वे मुंबई से वर्चुअल माध्यम से ही भक्तों को दर्शन और आशीर्वाद दे सके थे।
स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी ने 22 नवंबर 1956 को अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन स्वामी परमानंद जी के आशीर्वाद से घने जंगलों से घिरे प्राचीन तीर्थ स्थल धारकुंडी में साधना की शुरुआत की थी। उस दौर में यहां केवल एक गुफा थी और यह स्थान बेहद दुर्गम माना जाता था।
उनकी कठोर तपस्या और साधना से यह स्थान आज एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बन चुका है। आज धारकुंडी आश्रम प्रकृति और अध्यात्म के अद्भुत संगम के रूप में देशभर में जाना जाता है। पूज्य स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज का जीवन त्याग, तपस्या और सेवा की मिसाल रहा, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देता रहेगा।

