MP सरकार को बड़ा ''झटका'', केंद्र से हर साल 7500 करोड़ कम मिलेंगे, सिंहस्थ स्पेशल पैकेज नहीं मिला
Monday, Feb 02, 2026-08:28 PM (IST)
भोपाल: संसद में बजट पेश होते वक्त तालियों की गूंज और बीजेपी शासित राज्यों में जश्न जरूर दिखा, लेकिन जब राज्यों के हिस्से के पैसों की बात सामने आई तो मध्य प्रदेश के लिए तस्वीर बिल्कुल उलट निकली। 16वें वित्त आयोग ने इस बार राज्यों को मिलने वाले केंद्रीय करों के बंटवारे का फॉर्मूला बदल दिया है, जिसका सीधा नुकसान मध्य प्रदेश को हुआ है।
अब तक राज्यों की जरूरत और पिछड़ेपन यानी ‘इक्विटी’ को आधार बनाया जाता था, लेकिन इस बार ‘इकोनॉमिक एफिशिएंसी’ यानी आर्थिक कुशलता को भी बड़ा पैमाना बना दिया गया। मतलब साफ है- जो राज्य बेहतर टैक्स कलेक्शन और संसाधनों का कुशल इस्तेमाल करेंगे, उन्हें ज्यादा पैसा मिलेगा। इस नए फॉर्मूले में कर्नाटक सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है, जबकि मध्य प्रदेश सबसे नीचे फिसल गया है।
MP को करोड़ों का झटका, बढ़ेगा कर्ज का बोझ
आंकड़ों के मुताबिक, केंद्रीय करों में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 7.85 प्रतिशत से घटकर 7.35 प्रतिशत रह गई है। प्रतिशत में यह कटौती भले छोटी लगे, लेकिन राशि के लिहाज से यह बेहद भारी है। इस बदलाव से प्रदेश को कुल मिलाकर करीब 7,677 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। इस वित्तीय वर्ष में ही राज्य को 2,314 करोड़ रुपये कम मिलेंगे, जबकि अगले पांच सालों तक हर साल औसतन 7,500 करोड़ रुपये की कमी झेलनी पड़ेगी। एक ओर आमदनी घटेगी, तो दूसरी ओर लाड़ली बहना जैसी बड़ी और लोकप्रिय योजनाओं को चलाने के लिए सरकार को अपने संसाधनों से अतिरिक्त फंड जुटाना होगा। ऐसे में प्रदेश पर कर्ज और वित्तीय दबाव बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।
विपक्ष का तीखा वार: ‘मायका’ कहने वाली सरकार ने किया भेदभाव?
फंड कटौती को लेकर सियासत भी गरमा गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी मध्य प्रदेश को अपना ‘मायका’ बताती है और यहां की जनता ने 29 की 29 लोकसभा सीटें जिताकर समर्थन दिया, इसके बावजूद राज्य के साथ भेदभाव किया जा रहा है। सिंघार ने केंद्रीय कर में कटौती को प्रदेश की जनता और सांसदों का अपमान बताया। वहीं उज्जैन में 2026 में होने वाले सिंहस्थ मेले के लिए राज्य द्वारा मांगे गए 20,000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज पर भी बजट में कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई, जिससे निराशा और बढ़ गई है।

