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रायसेन में गैस सिलेंडरों की किल्लत: उपभोक्ताओं का सांची रोड पर चक्काजाम, घंटों इंतजार के बाद फूटा गुस्सा

Thursday, Apr 16, 2026-07:41 PM (IST)

रायसेन (शिवलाल यादव) : शहर में घरेलू गैस सिलेंडर की कमी को लेकर गुरुवार को उपभोक्ताओं का गुस्सा सड़कों पर उतर आया। भारत नगर कॉलोनी के समीप सांची रोड पर सैकड़ों लोगों ने चक्काजाम कर दिया। नाराज उपभोक्ताओं का आरोप था कि अमन गैस एजेंसी पर सिलेंडरों का स्टॉक खत्म हो गया। लाइनों में घंटों तेज धूप में खड़ा होने के बाद भी उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। घंटों इंतजार के बावजूद जब रसोई गैस सिलेंडर नहीं मिला, तो लोगों का सब्र जवाब दे गया और उन्होंने सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

सुबह से ही बड़ी संख्या में उपभोक्ता अमन गैस एजेंसी पहुंचे थे। यहां उन्हें बताया गया कि फिलहाल सिलेंडरों का स्टॉक खत्म हो चुका है और नई खेप आने में समय लगेगा। यह सुनते ही लोगों में नाराजगी फैल गई। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि वे पिछले दो-तीन दिनों से लगातार गैस एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन हर बार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। कुछ लोगों ने कहा कि घरों में कुकिंग गैस खत्म हो चुकी है। जिससे खाना बनाने तक में दिक्कत आ रही है।

स्थिति तब और बिगड़ गई जब इंतजार कर रहे लोगों की भीड़ बढ़ती चली गई। आक्रोशित उपभोक्ताओं ने भारत नगर कॉलोनी के पास सांची रोड पर जाम लगा दिया। जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। करीब एक घंटे तक सड़क पूरी तरह जाम रही।

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चक्काजाम की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। मौके पर कोतवाली पुलिस थाने के टीआई नरेंद्र गोयल और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और लोगों को समझाइश देने का प्रयास किया। अधिकारियों ने उपभोक्ताओं को आश्वासन दिया कि जल्द ही गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी और समस्या का समाधान किया जाएगा। इसके बाद काफी मशक्कत के बाद लोगों ने जाम हटाया और यातायात सुचारु हो सका।

उपभोक्ताओं का कहना है कि अमन गैस एजेंसी द्वारा समय पर सही जानकारी नहीं दी जा रही है, जिससे उन्हें बार-बार परेशान होना पड़ता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि गैस आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए और जरूरत के अनुसार पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया जाए। ताकि आम लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि रसोई गैस आपूर्ति में आई अस्थायी समस्या को जल्द दूर कर लिया जाएगा। संबंधित एजेंसी को निर्देश दिए गए हैं कि वे उपभोक्ताओं को समय पर जानकारी दें और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाएं।

इस पूरे घटनाक्रम ने शहर की गैस सिलेंडरों की आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते स्थिति में सुधार नहीं हुआ।तो आने वाले दिनों में लोगों का आक्रोश और बढ़ सकता है। फिलहाल प्रशासन ने जल्द समाधान का भरोसा दिलाया है, लेकिन उपभोक्ता ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस मामले में एसडीएम मनीष शर्मा ने बताया कि गैस एजेंसियों को रसोइगैस सिलेंडरों की आपूर्ति व्यवस्था सुधारने जिम्मेदारों को निर्देशित किया गया है।

शहर में घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की लगातार कमी, विवाह आयोजनों पर पड़ा असर

शहर सहित जिलेभर में घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की कमी अब गंभीर संकट का रूप लेती जा रही है। बीते लगभग एक महीने से आपूर्ति प्रभावित है।लेकिन 15 अप्रैल से शुरू हुए वैवाहिक मुहूर्तों ने इस समस्या को और विकराल बना दिया है। जिन परिवारों में शादी-विवाह के कार्यक्रम हैं। उनके सामने भोजन व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर में गैस कंपनियों के सिर्फ एक दो गैस डीलर हैं, जहां पहले रोजाना भोपाल से गैस सिलेंडरों की नियमित आपूर्ति होती थी। वर्तमान में हालात यह हैं कि सप्लाई हर तीसरे दिन ही पहुंच रही है।यानी आपूर्ति लगभग आधी रह गई है।जबकि मांग लगातार बढ़ती जा रही है। पहले जहां एक परिवार एक सिलेंडर से काम चला लेता था, वहीं अब अनिश्चितता के चलते लोग 2-2 सिलेंडर भरवाकर स्टॉक करने लगे हैं।जिससे कृत्रिम कमी और बढ़ गई है।

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विवाह आयोजनों पर असर

इस रसोई गैस संकट का सबसे ज्यादा असर विवाह आयोजनों पर पड़ा है। शहर में इन दिनों करीब 100 से अधिक छोटे-बड़े विवाह समारोह आयोजित हो रहे हैं। ऐसे में मैरिज गार्डन संचालकों ने भी साफ कर दिया है कि गैस सिलेंडर की व्यवस्था आयोजकों को स्वयं करनी होगी। पहले यह जिम्मेदारी गैस एजेंसियों के माध्यम से पूरी हो जाती थी।लेकिन अब गैस एजेंसियों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।

लकड़ी और डीजल भट्ठियों का सहारा

रसोई गैस की कमी के चलते अब लोग वैकल्पिक व्यवस्थाओं की ओर रुख कर रहे हैं। विवाह समारोहों में लकड़ी के गुटकों और डीजल भट्ठियों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। मिट्टी का तेल पहले ही बाजार से लगभग गायब हो चुका है। वहीं लकड़ी की कीमतों में भी उछाल आया है—जो लकड़ी पहले 5 रुपये किलो मिलती थी, वह अब 8 से 10 रुपये किलो तक पहुंच गई है।

प्रतिदिन 1500 कॉमर्शियल सिलेंडरों की जरूरत

गैस एजेंसी संचालकों के अनुसार शहर में प्रतिदिन करीब 1500 कॉमर्शियल सिलेंडरों की आवश्यकता है। लेकिन रसोई गैस सिलेंडरों की आपूर्ति नाममात्र की हो रही है। पहले जहां 1000 व्यावसायिक सिलेंडर आसानी से उपलब्ध हो जाते थे, अब वह घटकर महज 50 से 100 तक सीमित रह गए हैं। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कालाबाजारी भी खुलकर सामने आ रही है। कीमतों में भी भारी अंतर देखा जा रहा है। जहां घरेलू सिलेंडर की कीमत 930 रुपये है, वहीं बाजार में इसकी बिक्री 1500 रुपये तक हो रही है। कॉमर्शियल सिलेंडर, जिसकी निर्धारित कीमत 2359 रुपये है, वह 3000 रुपये तक बेचा जा रहा है। मजबूरी में लोग महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने को विवश हैं। प्रशासन की ओर से अब तक इस संकट के समाधान के लिए कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है।जिससे आम उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
 


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Content Writer

meena

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