बारिश और ओलों से फसलें बर्बाद, जानें कैसे और कितना मिलेगा मुआवजा, देखें पूरी प्रक्रिया
Thursday, Jan 29, 2026-10:10 PM (IST)
भोपाल: मध्य प्रदेश में मौसम की मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है। आंधी, बारिश और ओलावृष्टि के चलते प्रदेश के कई जिलों में गेहूं, चना और सरसों की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ के असर से करीब 60 फीसदी इलाकों में मौसम बिगड़ा, जिसके बाद हजारों किसान नुकसान की चिंता में हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिला प्रशासन को तुरंत अलर्ट मोड पर आने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने साफ कहा है कि “किसी भी किसान का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा, हर हाल में मुआवजा मिलेगा। लेकिन सवाल यह है कि बारिश-ओले से फसल खराब होने पर सरकार मुआवजा कैसे तय करती है, कितना पैसा मिलता है और इसकी प्रक्रिया क्या है?
किसानों को कितना मिलेगा मुआवजा? (RBC 6-4 के तहत राहत)
प्राप्त जानकारी के अनुसार सभी जिलों के कलेक्टरों से 24 घंटे के भीतर फसल नुकसान की रिपोर्ट मांगी गई है। राहत राशि RBC 6-4 (राजस्व पुस्तक परिपत्र) के तहत दी जाएगी।
राहत राशि का ब्रेकअप इस प्रकार है:
50% से अधिक फसल नुकसान: ₹32,000 प्रति हेक्टेयर
50% से कम नुकसान: ₹16,000 प्रति हेक्टेयर
25% से 33% नुकसान: ₹9,500 प्रति हेक्टेयर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर सीधे किसानों को सहायता राशि दी जाएगी।
क्या है RBC 6-4, जिसके तहत मिलता है मुआवजा?
RBC 6-4 यानी Revenue Book Circular, खंड-6, क्रमांक-4। आसान भाषा में कहें तो यह सरकार की आपदा राहत नियमावली है, जिसके तहत यह तय होता है कि प्राकृतिक आपदा आने पर किसे, कितना और कैसे आर्थिक मदद दी जाएगी।
इस नियम में ओलावृष्टि, बाढ़, सूखा, आंधी-तूफान जैसी आपदाएं शामिल हैं। नुकसान का सर्वे, पात्रता और राहत की सीमा—सब कुछ इसी नियम के तहत तय होता है।
फसल बीमा से अलग क्यों है RBC के तहत मिलने वाली सहायता? अक्सर किसान इस राहत राशि को फसल बीमा समझ लेते हैं, जबकि दोनों पूरी तरह अलग हैं।
फसल बीमा:
बीमा कंपनी देती है
प्रीमियम भरना पड़ता है
RBC 6-4 राहत:
सरकार देती है
कोई प्रीमियम नहीं
आपदा के बाद तत्काल आर्थिक सहायता
यानी यह सरकार की ओर से सीधी मदद होती है, ताकि किसान संकट से उबर सके।
फसल नुकसान का सर्वे कैसे होता है? जानिए पूरी प्रक्रिया
जैसे ही कोई प्राकृतिक आपदा आती है, जिला कलेक्टर फसल सर्वे के आदेश जारी करते हैं। इसके बाद एक संयुक्त टीम बनाई जाती है।
सर्वे टीम में शामिल होते हैं:
पटवारी (राजस्व विभाग)
ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (कृषि विभाग)
ग्राम सचिव/सहायक (पंचायत)
टीम खेतों में जाकर फसल की स्थिति देखती है, नुकसान का प्रतिशत तय करती है और ग्रामीणों की मौजूदगी में रिपोर्ट तैयार करती है।
अब तकनीक का भी इस्तेमाल हो रहा है
खेत की जियो-टैग्ड फोटो ली जाती है
‘सारा ऐप’ (Saara App) या अन्य सरकारी ऐप के जरिए फोटो और डेटा अपलोड किया जाता है
इसी रिपोर्ट के आधार पर किसानों को मुआवजा दिया जाता है।
सरकार का भरोसा: किसान का नुकसान नहीं होगा
सीएम मोहन यादव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सर्वे में कोई लापरवाही न हो और हर प्रभावित किसान को राहत मिले। प्रशासन को तेजी से आकलन कर रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए गए हैं।कुल मिलाकर, बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए सरकार ने राहत का रास्ता साफ कर दिया है। अब निगाहें सर्वे रिपोर्ट और मुआवजे के वितरण पर टिकी हैं।

