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राज्य में बड़ी कार्रवाईः पूर्व संपदा अधिकारी को किया निलंबित, करोड़ों के टेंडर विवाद में वायरल हुआ था वीडियो; अब फिर गरमाई सियासत

Tuesday, Jun 30, 2026-03:36 PM (IST)

बिलासपुरः छत्तीसगढ़ के बिलासपुर नगर निगम से जुड़े कथित टेंडर अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामले ने दो वर्ष पुराने एक कथित वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नया मोड़ ले लिया है। कथित वायरल वीडियो में नगर निगम के तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन द्वारा तत्कालीन महापौर रामशरण यादव पर 1 करोड़ 15 लाख रुपये के कथित लेन-देन का जिक्र किए जाने का दावा किया जा रहा है।

मामले में पूर्व संपदा अधिकारी के नाम से कथित फर्जी शिकायत, ब्लैकमेलिंग के आरोप और वीडियो की प्रामाणिकता को लेकर भी विवाद गहरा गया है। मामले में आरोप है कि गणेश ट्रेडर्स को नियमों के विपरीत टेंडर दिलाने के एवज में 1 करोड़ 15 लाख रुपये का लेन-देन हुआ था। वायरल वीडियो में राजेश देवांगन कथित रूप से इस राशि का उल्लेख करते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि वीडियो सामने आने के बाद देवांगन ने भाजपा नेता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट अनुभव तिवारी पर 50 लाख रुपये की मांग कर ब्लैकमेल करने तथा वीडियो को संपादित कर वायरल करने का आरोप लगाया है।

राजेश देवांगन का कहना है कि उनके नाम से जो लिखित शिकायत दी गई, वह फर्जी है और उन्होंने स्वयं कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई। उन्होंने कहा कि 'अनुभव तिवारी नाम के व्यक्ति ने शिकायत की है, जो मुकेश पाठक का दोस्त है और मेरे घर भी आता-जाता था। सोशल मीडिया पर वायरल किया गया वीडियो एडिट किया हुआ है। मेरे साथ किसी तरह की मारपीट भी नहीं हुई है। अनुभव तिवारी ने ही आवेदन तैयार कर मेरे नाम से शिकायत की है।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वसूली के लिए उन पर दबाव बनाया गया और इनकार करने पर वीडियो वायरल कर उन्हें बदनाम किया गया। इस बीच यह भी सामने आया है कि कथित शिकायत की पहले ही जांच की जा चुकी थी और उसे आधारहीन माना गया था। वहीं, अनुभव तिवारी की शिकायत को भी पुलिस पहले ही खारिज कर चुकी है।

कथित शिकायत के अनुसार करीब दो वर्ष पहले गणेश ट्रेडर्स के संचालक मोनू अग्रवाल को नगर निगम का एक टेंडर मिला था। आरोप है कि राजेश देवांगन ने मुकेश पाठक के माध्यम से मोनू अग्रवाल की मुलाकात तत्कालीन महापौर रामशरण यादव से कराई। शिकायत में दावा किया गया कि महापौर के बंगले में एमआईसी से टेंडर मंजूर कराने के बदले पहले 50 लाख रुपये, फिर 50 लाख रुपये और बाद में 12 लाख रुपये दिए गए। इसके बाद महापौर के कहने पर मुकेश पाठक के जरिए 3 लाख रुपये और दिए गए। शिकायत में यह भी कहा गया कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मुकेश पाठक मौजूद था। शिकायत में आगे उल्लेख है कि एमआईसी से टेंडर स्वीकृत होने के बाद कलेक्टर ने उस पर रोक लगा दी, जिसके बाद संबंधित पक्ष ने उच्च न्यायालय का रुख किया और मामला अभी लंबित है।

टेंडर विवाद के बाद गणेश ट्रेडर्स से जुड़े मोनू, राजा, शरद और अखिलेश द्वारा राजेश देवांगन को कार्यालय बुलाकर गाली-गलौज करने, 1 करोड़ 15 लाख रुपये लौटाने का दबाव बनाने, जान से मारने की धमकी देने और कई बार हमला करने के भी आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में यह भी कहा गया कि एक अवसर पर राजा अग्रवाल ने कांच की बोतल तोड़कर उनका गला काटने का प्रयास किया, जिससे वह किसी तरह बच निकले। कथित शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि बाद में उन्हें बंधक बनाकर दुकान की रजिस्ट्री अपने नाम कराने का दबाव बनाया गया तथा डरा-धमकाकर एक कथित फर्जी एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर और अंगूठा लगवाया गया, जिसमें 1 करोड़ 15 लाख रुपये नकद प्राप्त होने का उल्लेख किया गया।

उधर, तत्कालीन महापौर रामशरण यादव ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। नगर निगम के अपर आयुक्त खजांची कुमार ने कहा कि संबंधित टेंडर पहले ही निरस्त किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि वायरल वीडियो सामने आने के बाद पूर्व संपदा अधिकारी राजेश देवांगन को निलंबित कर दिया गया है तथा पूरे मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। अब समिति की जांच रिपोटर् पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

 


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Content Editor

Vandana Khosla

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