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मोदी की अपील से पहले ही सादगी की मिसाल हेमंत खंडेलवाल, न काफिला, न हूटर! VIP कल्चर से NO कनेक्शन

Wednesday, May 13, 2026-07:44 PM (IST)

भोपाल/बैतूल (रामकिशोर पंवार):  देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में नेताओं से वीआईपी कल्चर कम करने, अनावश्यक काफिलों से बचने और जनता के बीच सादगीपूर्ण जीवनशैली अपनाने की अपील की है। इस अपील के बाद देशभर में कई नेता अपने काफिले छोटे कर रहे हैं और सादगी की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। लेकिन मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष Hemant Khandelwal ऐसे नेता हैं, जिन्होंने यह जीवनशैली कोई नई नहीं अपनाई, बल्कि वर्षों से इसी परंपरा को निभाते आ रहे हैं।

प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद एक टीवी इंटरव्यू में हेमंत खंडेलवाल ने कहा था — “जंगल का राजा टाइगर क्या बोर्ड लगाकर घूमता है?”यह एक वाक्य ही उनकी कार्यशैली और सोच को दर्शाता है। टाइगर स्टेट कहे जाने वाले मध्यप्रदेश में भाजपा संगठन की कमान संभाल रहे हेमंत खंडेलवाल आज भी बिना दिखावे, बिना भारी-भरकम काफिले और बिना राजनीतिक तामझाम के प्रदेशभर में लगातार दौरे कर रहे हैं।

PunjabKesariन हूटर और न पदनाम!

सबसे खास बात यह है कि उनकी निजी गाड़ी पर न तो “प्रदेश अध्यक्ष” लिखा होता है और न ही “विधायक”। वे हूटर और अनावश्यक वीआईपी संस्कृति से भी दूरी बनाए रखते हैं। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भी उनका जनसंपर्क का तरीका नहीं बदला। वे आज भी अपने निजी वाहन से ही प्रदेश के जिलों और अपने विधानसभा क्षेत्र का दौरा करते हैं।
उनके साथ आमतौर पर केवल चालक, निजी सहायक और सीमित सहयोगी ही रहते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से सरकार द्वारा सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने के बावजूद वे अनावश्यक सुरक्षा घेरे से बचते हैं। यही वजह है कि कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच उनकी छवि एक सहज, सरल और जमीन से जुड़े नेता की बनी हुई है।

PunjabKesariपिता से मिली सादगी की प्रेरणा

Hemant Khandelwal भाजपा की उस परंपरा को आगे बढ़ाते दिखाई देते हैं, जिसमें संगठन पहले और दिखावा बाद में माना जाता है। वे अपने स्वर्गीय पिता Vijay Kumar Khandelwal की तरह सादगीपूर्ण जीवनशैली के लिए पहचाने जाते हैं। विजय कुमार खंडेलवाल चार बार सांसद रहे, लेकिन उन्होंने भी हमेशा सरल और कार्यकर्ता आधारित राजनीति को प्राथमिकता दी।
प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से हेमंत खंडेलवाल लगातार प्रदेश के अधिकांश जिलों का दौरा कर चुके हैं। बावजूद इसके वे अपने गृह जिले बैतूल से जीवंत संपर्क बनाए रखते हैं। कोशिश रहती है कि सप्ताह के अंतिम दिनों में वे बैतूल पहुंचकर कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से सीधे मुलाकात करें।

राजनीति के इस दौर में, जहां अक्सर नेताओं की पहचान लंबे काफिलों, हूटर और सुरक्षा घेरे से होती है, वहीं हेमंत खंडेलवाल अपनी सादगी, सहजता और संगठनात्मक संस्कृति के कारण अलग पहचान बना रहे हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा आम है कि वे पार्टी की मूल विचारधारा और संगठनात्मक संस्कारों पर चलने वाले नेताओं में गिने जाते हैं।


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Content Editor

Himansh sharma

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