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डिप्टी CM ने उठाया अधिकारियों का मुद्दा, विजयवर्गीय ने बताई CM से मुलाकात की परेशानी, बिप्लब देव के सामने आए नेताओं के दर्द

Friday, Oct 02, 2026-11:53 AM (IST)

भोपाल। मध्य प्रदेश बीजेपी में संगठनात्मक समन्वय और नेताओं के बीच आपसी तालमेल का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पार्टी के नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब के पहले मध्य प्रदेश दौरे के दौरान हुई बैठकों में संगठन के भीतर मौजूद मतभेदों और नेताओं की नाराजगी से जुड़े मुद्दे सामने आए। दो दिवसीय प्रवास के दौरान उन्होंने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया। इस दौरान जहां कुछ नेताओं ने अपनी समस्याएं और अपेक्षाएं रखीं, वहीं संगठन को एकजुट रखने के लिए प्रभारी ने स्पष्ट संदेश भी दिया।

बिप्लब देव की बैठकों का मुख्य संदेश यही रहा कि पार्टी के भीतर अलग-अलग विचार और असहमतियां होना स्वाभाविक है, लेकिन इनका असर संगठन के कामकाज पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने नेताओं और कार्यकर्ताओं को आपसी मतभेद बातचीत के माध्यम से दूर करने तथा सामूहिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने की नसीहत दी।

लोकतांत्रिक व्यवस्था को बताया संगठन की ताकत

बैठकों के बाद पार्टी के भीतर समन्वय की कमी और गुटबाजी को लेकर उठ रही चर्चाओं पर बिप्लब देव ने बीजेपी की आंतरिक व्यवस्था का उल्लेख किया। उनका कहना था कि पार्टी में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है। अलग-अलग नेताओं की राय सामने आना संगठन की प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, इस स्वतंत्रता का इस्तेमाल संगठनात्मक अनुशासन और एकजुटता को प्रभावित करने के लिए नहीं होना चाहिए। उनकी इस टिप्पणी को पार्टी के भीतर अलग-अलग स्तर पर सामने आ रही असहमतियों के बीच समन्वय स्थापित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

वरिष्ठ नेताओं की शिकायतों ने खींचा ध्यान

बैठक को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स में कुछ वरिष्ठ नेताओं की ओर से प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर अपनी परेशानियां रखे जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों की बातों को पर्याप्त महत्व नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाया।

वहीं, कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए लंबा इंतजार करना पड़ने की बात कही। रिपोर्ट्स में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से भी जिलों के दौरे के दौरान कलेक्टरों द्वारा प्रोटोकॉल का उचित पालन नहीं किए जाने की शिकायत का जिक्र है।

इन कथित शिकायतों ने बैठक को केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि सरकार और संगठन के बीच तालमेल को लेकर भी चर्चा का विषय बना दिया। हालांकि, इन बयानों के विस्तृत आधिकारिक प्रतिलेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने की पुष्टि नहीं है।

गुटबाजी पर स्पष्ट संदेश, बातचीत से सुलझाएं विवाद

पार्टी पदाधिकारियों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, बिप्लब देव ने नेताओं को साफ तौर पर कहा कि संगठन में गुटबाजी के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। यदि किसी नेता या कार्यकर्ता के बीच मतभेद हैं तो उन्हें सार्वजनिक विवाद बनाने के बजाय आपसी बातचीत से हल किया जाए।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि आपसी स्तर पर किसी समस्या का समाधान नहीं निकलता है तो वरिष्ठ नेतृत्व के सामने अपनी बात रखी जा सकती है। इस तरह उन्होंने संगठन के भीतर संवाद और अनुशासन दोनों को जरूरी बताया।

होर्डिंग-बैनर से ज्यादा जनता के काम पर जोर

बिप्लब देव ने कार्यकर्ताओं को केवल स्वागत-सत्कार, बड़े होर्डिंग, बैनर और फूल-मालाओं तक सीमित नहीं रहने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि संगठन की वास्तविक ताकत जनता के बीच किए जाने वाले काम से बनती है।

उनका जोर इस बात पर रहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। कार्यकर्ता सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों को आम लोगों तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। संगठन की पहचान प्रचार के दिखावे से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर किए गए कार्यों से मजबूत होती है।

युवा जोश और वरिष्ठों के अनुभव से मजबूत होगा संगठन

बैठक में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने संगठन में हर स्तर के कार्यकर्ता की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, बीजेपी में कोई कार्यकर्ता छोटा या बड़ा नहीं होता। संगठन की मजबूती के लिए युवाओं का उत्साह और वरिष्ठ नेताओं का अनुभव दोनों जरूरी हैं।

उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष से लेकर बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं को अपनी जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने का संदेश दिया। साथ ही संगठन की गतिविधियों को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए बूथ कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करने की बात भी कही।

सरकार और संगठन के बीच तालमेल पर रहेगी नजर

बिप्लब देव के पहले मध्य प्रदेश दौरे से यह संकेत मिला है कि प्रदेश संगठन में आपसी समन्वय स्थापित करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। बैठकों में सामने आई शिकायतें और गुटबाजी से दूर रहने की हिदायत बताती हैं कि संगठन के सामने केवल राजनीतिक कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की चुनौती नहीं है, बल्कि नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना भी अहम है।अब देखना होगा कि प्रदेश प्रभारी की इस नसीहत का असर पार्टी की कार्यप्रणाली में किस तरह दिखाई देता है और वरिष्ठ नेताओं से लेकर बूथ स्तर तक संगठनात्मक समन्वय को कितना मजबूत किया जा पाता है।


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Content Editor

Himansh sharma

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