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सरसों तेल के दाम में बड़ा उछाल! MSP से ₹800 महंगी फसल, 170 रुपये किलो तक पहुंचेगा तेल, मिलें बंद होने का खतरा

Thursday, Apr 02, 2026-11:46 PM (IST)

ग्वालियर। मध्य प्रदेश में इस बार सरसों का तेल आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ सकता है। वजह अंतरराष्ट्रीय हालात नहीं, बल्कि प्रदेश में सरसों का घटा उत्पादन और मंडियों में MSP से कहीं अधिक दाम पर बिक रही फसल है। इससे जहां किसानों को सीधा फायदा हो रहा है, वहीं उपभोक्ताओं के लिए तेल महंगा होना तय माना जा रहा है।

ग्वालियर-चंबल अंचल, जिसे सरसों उत्पादन का बड़ा केंद्र माना जाता है, इस बार मौसम की मार से जूझता रहा। अधिक समय तक सक्रिय मानसून के कारण बुवाई प्रभावित हुई, वहीं फसल पर पाला रोग और कटाई के दौरान बारिश ने उत्पादन को भारी नुकसान पहुंचाया। अनुमान है कि इस बार सरसों का उत्पादन करीब 40 प्रतिशत तक गिर गया है।

सरकार ने सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 6200 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन अंचल की मंडियों में यह फसल 6800 से 7000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही है। यानी किसानों को MSP से 600 से 800 रुपये अधिक दाम मिल रहे हैं। यही वजह है कि इस बार भावांतर योजना की जरूरत ही नहीं पड़ी।

हालांकि, इसका असर अब बाजार में दिखने लगा है। वर्तमान में सरसों तेल 150 से 160 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, लेकिन कारोबारियों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में इसके दाम 170 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकते हैं।

सरसों की कम आवक का असर उद्योगों पर भी पड़ रहा है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में बड़ी संख्या में मस्टर्ड ऑयल मिलें संचालित होती हैं, जो स्थानीय मंडियों पर निर्भर रहती हैं। लेकिन इस बार कच्चे माल की कमी के कारण कई इकाइयों के सामने बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। मुरैना क्षेत्र में पहले से ही आधी से अधिक इकाइयां बंद पड़ी हैं, और यदि जल्द पर्याप्त सरसों उपलब्ध नहीं हुई तो बाकी मिलों पर भी ताला लग सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन में कमी और बाजार में बढ़ती मांग के चलते आने वाले समय में कीमतों में और उछाल संभव है। ऐसे में जहां किसानों के लिए यह सीजन फायदेमंद साबित हो रहा है, वहीं आम उपभोक्ताओं को महंगाई का सामना करना पड़ेगा।


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Content Editor

Himansh sharma

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