MP हाईकोर्ट ने आरक्षण को लेकर दिया बड़ा फैसला, क्रीमीलेयर की पात्रता और परिभाषा की साफ,जाने अहम निर्णय
Sunday, Apr 05, 2026-05:23 PM (IST)
(ग्वालियर): मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर एक बड़ा फैसला आया है। OBC- आरक्षण पर एमपी हाईकोर्ट ने अहम फैसला दिया है। इस फैसले में कोर्ट ने क्रीमीलेयर की पात्रता को लेकर साफ- स्पष्ट व्याख्या करके बड़ा कुछ क्लीयर कर दिया है ।
दरअसल कोर्ट ने कहा है कि OBC- आरक्षण का लाभ लेने के लिए अभ्यर्थी के माता-पिता की सामाजिक और आर्थिक स्थिति ही एकमात्र पैमाना होगी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने ओबीसी क्रीमीलेयर की पात्रता को लेकर ये साफ कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि किसी महिला अभ्यर्थी का क्रीमीलेयर स्टेटस तय करने में उसके पति की आय या पद को आधार नहीं बनाया जा सकता। आरक्षण का लाभ लेने के लिए अभ्यर्थी के माता-पिता की सामाजिक और आर्थिक स्थिति ही एकमात्र पैमाना होगी। इस फैसले के साथ ही सहायक प्राध्यापक (लॉ) के पद पर हुई एक नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को भी खारिज कर दिया।
क्या था मामला और कोर्ट ने कहा क्या?
दरअसल इस मामले में चयनित अभ्यर्थी के पिता वर्ग-3 के कर्मचारी थे और माता गृहिणी है। कोर्ट ने साफ स्पष्ट कहा कि उनके आरक्षण के लिए माता-पिता की स्थिति पैमाना मानी जाएगी और पति का वेतन स्थिति तय नहीं करेगी। याचिकाकर्ता सुनीता यादव ने चयनित अभ्यर्थी गरिमा राठौर की नियुक्ति को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने कहा था कि गरिमा ओबीसी क्रीमीलेयर की श्रेणी में हैं। तर्क सुनीता यादव ने ये दिया था कि अभ्यर्थी गरिमा के पति सिविल जज हैं और उनकी पारिवारिक आय तय सीमा से भी ज्यादा है।
क्रीमीलेयर का निर्धारण जन्म के आधार पर मिली सामाजिक स्थिति होती है- कोर्ट
इस मामले में कोर्ट ने सुनवाई में साफ कर दिया कि क्रीमीलेयर का निर्धारण जन्म के आधार पर मिली सामाजिक स्थिति से होता है। जैसी की इस केस में है कि पति की आय को माता-पिता की आय में नहीं जोड़ा जा सकता है। लिहाजा मध्य प्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण की मांग के बीच ये फैसला काफी अहम माना जा रहा है।

