मलाईदार पदों के लिए बीजेपी में बढ़ी खींचतान, निगम-मंडल और प्राधिकरणों में फंसा पेंच, अटकी नियुक्तियां
Monday, May 11, 2026-12:40 PM (IST)
भोपाल। मध्यप्रदेश में भाजपा संगठन और सत्ता के बीच राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। निगम-मंडल, बोर्ड, आयोग और विकास प्राधिकरणों में लंबित नियुक्तियों को लेकर कई स्तरों पर असहमति के चलते प्रक्रिया अटक गई है। सूत्रों के मुताबिक, कुल 31 से अधिक महत्वपूर्ण पदों पर अब तक सहमति नहीं बन पाई है। इन पदों में कई ऐसे निगम और प्राधिकरण शामिल हैं, जिन्हें राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से “मलाईदार” माना जाता रहा है। इसी कारण इन पर दावेदारी को लेकर गुटबाजी भी तेज हो गई है।
भोपाल और इंदौर विकास प्राधिकरण पर सबसे ज्यादा खींचतान
भोपाल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद को लेकर पूर्व से चर्चा में चल रहे चेतन सिंह के नाम पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। बताया जा रहा है कि कुछ मंत्री और विधायक अपने-अपने समर्थकों को इस पद पर काबिज कराने की कोशिश में हैं, ताकि भविष्य की विकास योजनाओं का राजनीतिक लाभ अपने क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सके। इसी तरह इंदौर विकास प्राधिकरण को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। लंबे समय से चर्चा में रहे हरिनारायण यादव के नाम पर आम सहमति नहीं बन पाई है। सूत्रों का दावा है कि नाम लगभग तय होने के बावजूद एक वरिष्ठ नेता के हस्तक्षेप के बाद मामला दिल्ली स्तर तक पहुंच गया और वहां से ‘वीटो’ जैसी स्थिति बन गई।
50 से ज्यादा नेता नियुक्तियों की दौड़ में
अब तक जिन नेताओं को राजनीतिक नियुक्तियों में स्थान नहीं मिल पाया है, ऐसे 50 से अधिक नेता बाकी बचे निगम-मंडलों, आयोगों और बोर्डों में एडजस्टमेंट के लिए सक्रिय हो गए हैं। संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर इन नामों को लेकर लगातार मंथन जारी है।
31 प्रमुख संस्थानों में नियुक्तियां लंबित
प्रदेश में जिन संस्थानों में नियुक्तियां अभी बाकी हैं, उनमें पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग, गौपालन एवं पशु संवर्धन बोर्ड, खनिज विकास निगम, कौशल विकास एवं रोजगार बोर्ड, ऊर्जा विकास निगम, पर्यटन बोर्ड, महिला वित्त एवं विकास निगम, कृषि विपणन बोर्ड, माटीकला बोर्ड, इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम, सफाई कर्मचारी आयोग, कृषक आयोग सहित कई निगम, अकादमियां और विकास प्राधिकरण शामिल हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय विकास प्राधिकरणों में भारिया, कोल जनजाति, कटनी, महाकौशल, बुंदेलखंड और विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण भी लंबित सूची में शामिल हैं।
सरकारी खजाने पर बढ़ने लगा अतिरिक्त भार
राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर जहां एक ओर सत्ता संतुलन साधने की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर इसके आर्थिक प्रभाव भी सामने आने लगे हैं। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों पर नियुक्त व्यक्तियों के लिए कार्यालय, वाहन, स्टाफ और अन्य सुविधाओं पर प्रति माह 3 से 5 लाख रुपये तक का अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान है।
दोहराव वाली नियुक्तियों पर भी चर्चा
हाल ही में कुछ राजनीतिक नियुक्तियों में ऐसे नाम भी सामने आए हैं जो पहले भी महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। इनमें विनोद गोटिया, सत्येंद्र भूषण सिंह और महेंद्र सिंह यादव जैसे नेता शामिल हैं, जिन्हें दोबारा या वैकल्पिक जिम्मेदारियां दी गई हैं।
संगठन और सरकार के बीच संतुलन की चुनौती
फिलहाल भाजपा संगठन और राज्य सरकार के बीच इन नियुक्तियों को लेकर संतुलन साधने की कोशिश जारी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ नामों पर अंतिम मुहर लग सकती है, लेकिन गुटीय खींचतान के चलते प्रक्रिया अभी और लंबी खिंच सकती है।

