MP राज्यसभा उपचुनाव में आज से नामांकन, BJP प्रदेश के बड़े नेता पर लगा सकती है दांव, इन दिग्गजों के नाम चर्चा में
Monday, Oct 26, 2026-12:23 PM (IST)
भोपाल। मध्यप्रदेश से खाली हुई राज्यसभा की एक सीट पर सियासी हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद इस सीट पर उपचुनाव की प्रक्रिया सोमवार, 26 अक्टूबर से शुरू हो रही है। निर्वाचन कार्यक्रम के तहत आज अधिसूचना जारी होने के साथ ही उम्मीदवारों के नामांकन का रास्ता खुल जाएगा। भाजपा के भीतर इस सीट को लेकर कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं, लेकिन पार्टी ने अभी तक अपने प्रत्याशी के नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है।
राज्यसभा की यह सीट भाजपा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में पार्टी किस नेता पर भरोसा जताती है, इस पर राजनीतिक गलियारों में नजरें टिकी हुई हैं। संभावित उम्मीदवारों की सूची में मध्यप्रदेश के नेताओं के साथ दूसरे राज्यों के चेहरों के नाम भी सामने आ रहे हैं।
वनथी श्रीनिवासन से लेकर MP के नेताओं तक, कई नाम चर्चा में
संभावित दावेदारों में तमिलनाडु भाजपा की पूर्व विधायक वनथी श्रीनिवासन का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। वहीं, मध्यप्रदेश से भी कई नेताओं को इस सीट के लिए संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है। इनमें पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया, प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी, राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक आशीष अग्रवाल, भाजपा के पूर्व उपाध्यक्ष विनोद गोटिया, प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेंद्र बरुआ और पूर्व मंत्री रंजना बघेल के नाम चर्चा में हैं।
राजनीतिक चर्चाओं के बीच यह भी माना जा रहा है कि पार्टी किसी ऐसे नेता को मौका दे सकती है, जिसका संबंध मध्यप्रदेश से बाहर हो। हालांकि, इन सभी नामों को फिलहाल संभावनाओं के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अंतिम फैसला भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व करेगा।
229 विधायकों के वोट से तय होगा उम्मीदवार का भाग्य
राज्यसभा उपचुनाव में विधानसभा सदस्यों की भूमिका निर्णायक होगी। मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं, लेकिन कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा मतदान में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। ऐसे में चुनावी गणित 229 विधायकों के आधार पर देखा जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार की जीत के लिए जरूरी मतों की संख्या निर्धारित चुनावी नियमों के अनुसार तय होगी। भाजपा की विधानसभा में स्थिति को देखते हुए पार्टी के उम्मीदवार की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। हालांकि, विधायकों की वास्तविक संख्या और मतदान के समय उनकी स्थिति भी चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है।
निर्मला सप्रे के वोट पर भी रहेंगी निगाहें
बीना से विधायक निर्मला सप्रे की स्थिति भी इस चुनाव में चर्चा का विषय बनी हुई है। वह खुद को कांग्रेस से जुड़ा बताती हैं, जबकि उन्हें भाजपा के कार्यक्रमों में भी देखा गया है। उनके मामले में दलबदल से जुड़ा विवाद होने के कारण उनकी राजनीतिक स्थिति को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
ऐसे में चुनाव के दौरान उनके मत की स्थिति पर भी नजर रहेगी। दोनों दलों के लिए विधायकों की वास्तविक संख्या और मतदान की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, अंतिम चुनावी तस्वीर संबंधित कानूनी स्थिति और आधिकारिक प्रक्रियाओं के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
अप्रैल 2030 तक था मुरुगन का कार्यकाल
एल. मुरुगन सितंबर 2021 में पहली बार तमिलनाडु से राज्यसभा के सदस्य बने थे। इसके बाद 3 अप्रैल 2024 को उन्होंने मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यभार संभाला। उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक निर्धारित था, लेकिन अक्टूबर 2026 में उनके इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हो गई। अब उपचुनाव के जरिए इस रिक्त सीट को भरा जाएगा। नए सदस्य का कार्यकाल संबंधित निर्वाचन और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार तय होगा।
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की 11 सीटें
मध्यप्रदेश से राज्यसभा में कुल 11 सदस्य चुने जाते हैं। मुरुगन के इस्तीफे से पहले भाजपा के सात और कांग्रेस के तीन सदस्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। इस्तीफे के बाद एक सीट रिक्त हो गई है।अब उपचुनाव में भाजपा किसे उम्मीदवार बनाती है, यह सबसे बड़ा सवाल है। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है। पार्टी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगा कि खाली हुई इस सीट पर किस नेता को राज्यसभा पहुंचने का अवसर मिलता है।

