गोविंद सिंह को CM ने किया साफ मना, इंदर सिंह की एक दलील पर बदल गया फैसला, तबादलों पर बड़ा खुलासा
Wednesday, Jun 17, 2026-12:52 PM (IST)
भोपाल। मध्यप्रदेश में तबादला नीति की अंतिम घड़ी में एक दिलचस्प घटनाक्रम सामने आया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट बैठक के दौरान पहले तो तबादलों की समय-सीमा बढ़ाने की मांग को सख्ती से खारिज कर दिया, लेकिन बाद में एक अन्य मंत्री के आग्रह पर फैसला बदलते हुए मोहलत बढ़ाने की मंजूरी दे दी। इस निर्णय के बाद देर रात तक प्रदेशभर में अधिकारियों और कर्मचारियों के बड़े पैमाने पर तबादला आदेश जारी होते रहे।
सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने तबादलों की समय-सीमा बढ़ाने का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि 1 से 15 जून के बीच का समय पर्याप्त नहीं रहा और कई प्रस्ताव लंबित रह गए हैं। हालांकि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अंतिम तिथि पहले से तय थी और अब इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
लेकिन बैठक के दौरान ही मंत्री इंदर सिंह परमार ने मामला अलग ढंग से रखा। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने यह तर्क रखा कि बड़ी संख्या में ऐसे तबादला प्रस्ताव हैं जिन्हें विभागीय स्तर पर पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन तकनीकी कारणों और पोर्टल पर बढ़े दबाव के चलते आदेश जारी नहीं हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि कई फाइलों पर 16 जून की तारीख दर्ज है, इसलिए इन मामलों को अवसर दिया जाना चाहिए।
सूत्रों का दावा है कि मंत्री परमार की दलीलों को सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने सीमित अवधि के लिए राहत देने पर सहमति जताई और तबादलों की समय-सीमा 16 जून की रात 12 बजे तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलते ही सामान्य प्रशासन विभाग ने संशोधित आदेश जारी किए, जिसके बाद विभिन्न विभागों में लंबित प्रस्तावों को तेजी से निपटाया गया। नतीजा यह रहा कि अंतिम घंटों में प्रदेशभर में हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादला आदेश जारी हुए।
राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस घटनाक्रम की चर्चा इसलिए भी है क्योंकि एक ही बैठक में पहले समय-सीमा बढ़ाने से साफ इनकार किया गया और बाद में विशेष परिस्थितियों का हवाला देकर फैसला बदल दिया गया। हालांकि सरकार की ओर से इसे तकनीकी बाधाओं से प्रभावित मामलों को राहत देने वाला व्यावहारिक निर्णय माना जा रहा है।

