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MP की चर्चित महिला अफसर पर 75 लाख मांगने का आरोप, CM मोहन तक पहुंची शिकायत

Sunday, Aug 02, 2026-11:53 AM (IST)

कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी जिले में नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया पर लगे गंभीर आरोपों ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। पहले एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी से कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया और अब हत्या के एक प्रकरण में 75 लाख रुपये की कथित मांग का आरोप भी सामने आया है। दोनों मामलों की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद जांच शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, कटनी के ट्रांसपोर्ट व्यवसायी महेंद्र जैन ने आरोप लगाया है कि उनकी रेत और डोलोमाइट परिवहन में लगी हाईवा गाड़ियों की जांच के दौरान उनसे कथित रूप से 30 हजार रुपये की मांग की गई। उनका दावा है कि तत्काल 25 हजार रुपये दिए गए, जबकि अगले ही दिन उन्होंने पूरे मामले की शिकायत जिला पुलिस अधीक्षक से कर दी।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला पुलिस अधीक्षक ने प्रारंभिक जांच कराई। जांच के दौरान CSP के चालक आरक्षक केशव सिंह को निलंबित कर दिया गया। साथ ही CSP नेहा पच्चीसिया के अधीन आने वाले कुठला, माधवनगर और रंगनाथ नगर थानों का प्रभार अस्थायी रूप से दूसरे अधिकारी को सौंप दिया गया।

इसी बीच एक अन्य मामला भी सामने आया है, जिसने पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया है। हत्या के एक प्रकरण में गिरफ्तार आरोपी आकाश लोधी और उसके परिजनों ने आरोप लगाया है कि मामले में राहत दिलाने और जेल से छुड़ाने के नाम पर उनसे 75 लाख रुपये की मांग की गई। परिवार का यह भी आरोप है कि उन पर जमीन बेचकर रकम जुटाने का दबाव बनाया गया।

आरोपी पक्ष के अनुसार, आर्थिक दबाव और कथित मांग पूरी न होने पर परिवार ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ लिया और मामला राज्य स्तर तक पहुंच गया।

इन दोनों मामलों को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वतंत्र जांच कराने का निर्णय लिया है। जानकारी के मुताबिक, जांच की जिम्मेदारी जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनु बेनीवाल को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तय होगी।

फिलहाल यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि CSP नेहा पच्चीसिया पर लगे सभी आरोप शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोप हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के बाद ही होगी। जांच पूरी होने तक किसी भी पक्ष को दोषी या निर्दोष मानना उचित नहीं होगा।


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Content Editor

Himansh sharma

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