शिक्षक दिवस पर सम्मान नहीं, काली पट्टी और काले कपड़ों में विरोध, टीईटी परीक्षा के विरोध में शिक्षकों ने मनाया काला दिवस
Saturday, Sep 05, 2026-04:08 PM (IST)
रायसेनः शिक्षक दिवस पर शनिवार को जहां स्कूलों में शिक्षकों के सम्मान और कार्यक्रमों की परंपरा रही है, वहीं रायसेन में शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने इस दिन को विरोध के काले दिन के रूप में मनाया। सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा अनिवार्य किए जाने के विरोध में जिलेभर के शिक्षक-शिक्षिकाएं काले कपड़े पहनकर महामाया चौक स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने एकत्रित हुए। रिमझिम बारिश के बीच शिक्षकों ने शासन के फैसले के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद सामूहिक रूप से ‘रघुपति राघव राजाराम’ का भजन गाकर अपना विरोध जताया। प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने काली पट्टी, काला गमछा और काली साड़ी धारण कर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान “शासन तेरी तानाशाही नहीं चलेगी” जैसे नारे लगाए गए। शिक्षकों का कहना था कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर टीईटी परीक्षा अनिवार्य करना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से इस प्रावधान को वापस लेने की मांग की।

शिक्षक दिवस पर स्कूलों में नहीं हुए आयोजन
इस बार शहर के सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में शिक्षक दिवस के आयोजन नहीं हो सके। छात्र-छात्राओं द्वारा शिक्षकों के सम्मान के कार्यक्रम भी नहीं हुए। इसके पीछे एक कारण कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा द्वारा जारी अवकाश आदेश भी रहा। आदेश में शिक्षक दिवस, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और रविवार का अवकाश घोषित किया गया था। यह आदेश गुरुवार शाम को जारी हुआ था। ऐसे में शनिवार को स्कूलों में शिक्षक दिवस के आयोजन नहीं हो सके।
गांधी प्रतिमा के सामने एकजुट हुए शिक्षक
शिक्षक संयुक्त मोर्चा जिला रायसेन के आह्वान पर शिक्षक-शिक्षिकाएं सुबह महामाया चौक पहुंचे। जहां गांधी प्रतिमा के सामने एकत्रित होकर उन्होंने टीईटी परीक्षा संबंधी शासन की व्यवस्था के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शन से पहले और बाद में शिक्षकों ने सामूहिक भजन भी किया। इसके बाद शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों के लिए रवाना हुए।

बारिश के बीच नारेबाजी, काले कपड़ों में दिखा आक्रोश
प्रदर्शन के दौरान शिक्षक-शिक्षिकाएं काले कपड़ों में नजर आए। रिमझिम बारिश के बावजूद वे गांधी प्रतिमा के सामने डटे रहे। शिक्षकों ने कहा कि शिक्षक दिवस उनके लिए सम्मान और गौरव का दिन है। लेकिन इस बार सेवारत शिक्षकों पर परीक्षा अनिवार्य किए जाने के विरोध में इसे काला दिवस मनाना पड़ा। उन्होंने शासन से मांग की कि लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों के संबंध में इस व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए। इस अवसर पर शिक्षक संयुक्त मोर्चा के जिलाध्यक्ष सूर्य प्रकाश विश्वकर्मा, सीताराम रायकवार, राजकुमार खत्री, हरिराम विश्वकर्मा, अजय सिंह बघेल,राजकुमार खत्री राकेश अहिरवार, प्रमोद दुबे,राजेश मीणा, अभिषेक अग्निहोत्री, कैलाश मेहरा,राजेश मालवीय मनीष नामदेव मनोज शाक्य,पुष्पा प्रजापति, राम देवी मालवीय,प्रभा कन्नौजिया, रानी देवी तामरे, प्रभा कन्नौजे,अरविंद कटियार, राकेश अहिरवार आदि उपस्थित हुए।

शिक्षकों द्वारा गांधीवादी तरीके से सामूहिक भजन से दिया संदेश
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने सामूहिक रूप से ‘रघुपति राघव राजाराम’ का भजन गाया। गांधी प्रतिमा के सामने हुए इस सामूहिक भजन के माध्यम से शिक्षकों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। इसके बाद उन्होंने शासन के फैसले के खिलाफ नारे लगाए और अपनी मांग दोहराई।
फैसला वापस लेने की मांग
शिक्षकों का कहना था कि वे लंबे समय से विद्यार्थियों को पढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। ऐसे में सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा अनिवार्य किए जाने का प्रावधान उनके लिए चिंता का विषय है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस व्यवस्था को वापस लिया जाए, ताकि शिक्षकों को राहत मिल सके। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने अपनी एकजुटता दिखाई और कहा कि मांग पूरी होने तक वे विरोध जारी रखेंगे।

