छत्तीसगढ़ से इस कांग्रेस नेता को राज्य सभा भेजने की तैयारी! जल्द लग सकती है मुहर
Friday, Feb 27, 2026-08:55 PM (IST)
रायपुर : छत्तीसगढ़ में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में दावेदारों की लंबी सूची सामने आ रही है। वरिष्ठ नेताओं से लेकर युवा चेहरों तक के नाम चर्चा में हैं। खासकर कांग्रेस खेमे में संभावित उम्मीदवारों को लेकर मंथन और लॉबिंग की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
कांग्रेस में दावेदारों की लंबी कतार
कांग्रेस में दीपक बैज, टीएस सिंहदेव, मोहन मरकाम, अमरजीत भगत और धनेंद्र साहू जैसे नेताओं के नामों की चर्चा जोरों पर है। बताया जा रहा है कि इन नेताओं की ओर से दिल्ली तक दावेदारी मजबूत की जा रही है। पार्टी के भीतर समीकरण साधने की कवायद भी जारी है।
डॉ. चरण दास महंत का नाम चर्चा में
इन सबके बीच नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत का नाम अब खुलकर सामने आ गया है। हालांकि उनके नाम की चर्चा पहले अंदरखाने होती रही, लेकिन हाल ही में भाजपा सरकार में वित्त मंत्री और रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी ने विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान उनका जिक्र कर सियासी अटकलों को हवा दे दी। ओपी चौधरी ने कहा कि चर्चा है कि डॉ. महंत राज्यसभा जा सकते हैं और सक्ती से उनके बेटे सूरज महंत विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर तेज हो गया है।
परिवार और राजनीतिक समीकरण
यह भी उल्लेखनीय है कि डॉ. महंत पहले भी राज्यसभा जाने की इच्छा जता चुके हैं। हालांकि वर्तमान में उनके परिवार से ज्योत्सना महंत लोकसभा सदस्य हैं। ऐसे में यदि डॉ. महंत राज्यसभा की ओर रुख करते हैं, तो यह कांग्रेस के भीतर बड़े राजनीतिक संतुलन का संकेत माना जाएगा। अब सवाल यही है कि क्या कांग्रेस नेतृत्व डॉ. सीडी महंत पर भरोसा जताएगा, या फिर युवा और संगठनात्मक चेहरों को प्राथमिकता देगा। फिलहाल आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन छत्तीसगढ़ की सियासत में राज्यसभा चुनाव ने हलचल जरूर बढ़ा दी है।
बीजेपी से इस नेत्री का नाम
इस बार राज्यसभा की एक सीट बीजेपी को मिलने वाली है। हालांकि अंतिम फैसला दिल्ली से होगा लेकिन लोकसभा हार चुकीं सरोज पांडेय इस सीट के लिए जोर लगा रही हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि तेज तर्रार सरोज पांडेय को बीजेपी संसद में ले ले जा सकती है। वे लोकसभा का चुनाव महंत की पत्नी ज्योत्सना महंत के सामने लड़ीं थीं लेकिन वे बाहरी उम्मीदवार की छवि के साथ हार गईं। हालांकि अंतिम मुहर दिल्ली हाईकमान से लगेगी।

