''विकसित भारत- जी राम जी'' को लेकर भ्रम फैला रहे राहुल-खरगे-शिवराज सिंह, बोले- मनरेगा सिर्फ कागजों में था
Monday, Jan 19, 2026-08:42 PM (IST)
भोपाल/नई दिल्ली : कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘विकसित भारत- जी राम जी'को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा पार्टी नेता राहुल गांधी पर आरोप लगाया है कि वे इस मामले में गलत बोलकर भ्रम फैला रहे हैं लेकिन सच को ज्यादा देर तक छिपाया नहीं जा सकता है। शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को यहां पत्रकारों से कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के समय मनरेगा सिर्फ कागजों तक सीमित था। मनरेगा को लेकर उस समय जो माहौल था उससे गरीब परेशान थे और मजदूर काम मांगता था तो और अगर किसी कारण काम नहीं कर पाया तो उसे बेरोजगारी भत्ता नहीं मिलता। मजदूर विरोधी इस व्यवस्था को मोदी सरकार ने नये कानून से हटा दिया है। उनका कहना था कि उनकी सरकार में जिस तरह का माहौल था और जिस तरह के काम कांग्रेस सरकार में हुए हैं उससे साफ है कि कांग्रेस ने अपनी सोच, विचारधारा और आदर्श को छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपना मूल चरित्र ही छोड़ दिया है।
पार्टी पहले राष्ट्र प्रथम और गरीब कल्याण की बात करती थी लेकिन अब उसके लिए न राष्ट्र प्राथमिकता में है और ना ही गरीब। उन्होंने आरोप लगाया कि 1971 में ‘गरीबी हटाओ'का नारा देने वाली कांग्रेस ने गरीबों को ही हाशिए पर धकेल दिया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी की रेखा से बाहर निकाला है। केंद्रीय मंत्री ने ‘विकसित भारत जी-राम-जी' योजना की विशेषता बताते हुए कहा कि इसमें 100 दिन की जगह 125 दिन के काम की गारंटी दी गई है। इससे मजदूरों को न केवल काम का अधिकार मिलेगा, बल्कि 15 दिन के भीतर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान, समय पर मजदूरी न मिलने पर विलंबित भुगतान पर अतिरिक्त धन देने की व्यवस्था और मजदूरों के अधिकारों की‘संपूर्ण सुरक्षा'सुनिश्चित की गई है। विकसित ग्राम पंचायत योजना के माध्यम से ग्रामसभा और ग्राम पंचायत खुद काम तय करेंगी और कम से कम 50 प्रतिशत काम ग्राम पंचायत के माध्यम से ही होगा और इसमें ठेकेदारों की कोई भूमिका नहीं होगी।
शिवराज सिंह ने मेट, रोजगार सहायक और तकनीकी स्टाफ का काम छिनने के दावे को भी भ्रामक बताया और कहा कि प्रशासनिक व्यय 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है, ताकि मेट, रोजगार सहायकों और तकनीकी कर्मचारियों को समय पर और उचित मानदेय मिल सके। उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष में 1,51,282 करोड़ रुपए के प्रस्ताव का प्रावधान है, जिसमें 95,600 करोड़ रुपए से अधिक केंद्र सरकार देगी।

