राज्यसभा चुनाव में BJP का बड़ा खेला? तीसरे उम्मीदवार की अटकलों से बढ़ी हलचल, कांग्रेस ने भी तैयार किया प्लान-B
Friday, Jun 05, 2026-01:11 PM (IST)
भोपाल: मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी बिसात बिछ चुकी है। भारतीय जनता पार्टी ने अपने दो उम्मीदवारों के नाम घोषित कर राजनीतिक संकेत दे दिए हैं, वहीं कांग्रेस ने भी अपनी दावेदार मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारकर मुकाबले की तस्वीर साफ कर दी है। संख्या बल के हिसाब से दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिखाई दे रही हैं, लेकिन राजनीति केवल आंकड़ों का खेल नहीं होती। कई बार एक चाल पूरे समीकरण बदल देती है।
विधानसभा में भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के खाते में 63 विधायक हैं। सामान्य परिस्थितियों में परिणाम तय माने जा सकते हैं, लेकिन कांग्रेस की चिंता उस गणित से शुरू होती है जहां उसके कुछ विधायक मतदान से दूर रह सकते हैं। ऐसे में पार्टी का बहुमत वाला समीकरण कमजोर पड़ सकता है और क्रॉस वोटिंग की आशंका उसे बेचैन कर रही है।
सियासी गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा भाजपा के संभावित तीसरे उम्मीदवार को लेकर है। फिलहाल पार्टी ने केवल दो नामों की घोषणा की है, लेकिन यदि अंतिम समय में भाजपा तीसरा प्रत्याशी उतारती है तो चुनाव का रोमांच कई गुना बढ़ जाएगा। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के लिए अपनी एकमात्र सीट बचाना चुनौती बन सकता है। यही वजह है कि पार्टी अभी से अपने विधायकों को एकजुट रखने और किसी भी तरह की टूट-फूट रोकने की रणनीति पर काम कर रही है।
मध्यप्रदेश की राजनीति में पिछले वर्षों में हुए घटनाक्रम कांग्रेस को सतर्क रहने का संदेश देते हैं। सत्ता परिवर्तन से लेकर विधायकों की टूट तक, कई ऐसे उदाहरण हैं जिन्होंने पार्टी नेतृत्व को यह समझा दिया है कि अंतिम वोट पड़ने तक कोई भी मुकाबला पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता।
सूत्रों की मानें तो कांग्रेस ने भी ‘प्लान-बी’ तैयार कर रखा है। यदि भाजपा कोई बड़ा दांव चलती है तो कांग्रेस भी राजनीतिक संतुलन साधने के लिए किसी बड़े चेहरे को मैदान में उतार सकती है। यही कारण है कि चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है।
21 जून को भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी और केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह भी राज्यसभा से विदा लेंगे। दिग्विजय सिंह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वे दोबारा राज्यसभा नहीं जाएंगे। ऐसे में कांग्रेस ने नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संकेत देते हुए मीनाक्षी नटराजन पर भरोसा जताया है।
फिलहाल संख्या भाजपा के पक्ष में है, लेकिन नजरें उस संभावित ‘तीसरे उम्मीदवार’ पर टिकी हैं जो चुनाव को औपचारिक प्रक्रिया से निकालकर सियासी रोमांच में बदल सकता है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि राज्यसभा चुनाव केवल गणित का खेल रहेगा या फिर मध्यप्रदेश की राजनीति एक बार फिर किसी बड़े ‘खेला’ की गवाह बनेगी।

