7 करोड़ के डामरीकरण पर रीवा महापौर का बड़ा सवाल: सीमेंट रोड पर डामर क्यों, जांच से तय हो जिम्मेदारी
Thursday, Oct 01, 2026-03:08 PM (IST)
रीवा। शहर की सड़कों की हालत को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बरसात से पहले कराए गए डामरीकरण के काम को लेकर कांग्रेस महापौर अजय मिश्रा ‘बाबा’ ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं। महापौर ने करीब 7 करोड़ रुपए की लागत से हुए डामरीकरण की जांच कराने की मांग करते हुए यह पता लगाने की बात कही है कि काम को मंजूरी किस स्तर से मिली, इसे किस एजेंसी ने कराया और सड़क की मौजूदा स्थिति के लिए जिम्मेदारी किसकी है।
महापौर का आरोप है कि शहर के कुछ हिस्सों में पहले से मौजूद सीमेंट की सड़कों के ऊपर ही डामर की परत बिछाई गई। उनका सवाल है कि जब सड़क की सतह पहले से सीमेंट की थी तो उस पर दोबारा डामरीकरण कराने की जरूरत क्यों पड़ी। उनके मुताबिक इस तरह के काम की उपयोगिता और गुणवत्ता दोनों की जांच जरूरी है।
बारिश के बाद कई जगह उखड़ी डामर की परत
महापौर के अनुसार शहर में जयस्तंभ, स्टेच्यू चौराहा, फ्लाइओवर क्षेत्र, छोटीपुल, कॉलेज चौराहा और फोर्ट रोड सहित कई स्थानों पर डामरीकरण कराया गया था। यह काम मानसून शुरू होने से पहले पूरा कराया गया। बारिश के बाद कुछ स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत उखड़ने की शिकायत सामने आने लगी, जिससे सड़क की स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
महापौर ने कहा कि सड़क निर्माण या मरम्मत का उद्देश्य लोगों को बेहतर और टिकाऊ आवागमन सुविधा देना होना चाहिए। यदि डामरीकरण के कुछ समय बाद ही उसकी परत खराब होने लगे तो काम की गुणवत्ता और प्रक्रिया की समीक्षा की जानी चाहिए।
‘किसने दी मंजूरी’, जांच में सामने आए पूरी प्रक्रिया
अजय मिश्रा ‘बाबा’ ने पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि सिर्फ सड़क की वर्तमान स्थिति देखना पर्याप्त नहीं होगा। जांच में यह भी सामने आना चाहिए कि संबंधित कार्य का प्रस्ताव किस विभाग या स्तर से तैयार हुआ, तकनीकी स्वीकृति किसने दी, काम की निगरानी किस अधिकारी या एजेंसी ने की और भुगतान किस प्रक्रिया के तहत किया गया।
महापौर ने डामरीकरण की गुणवत्ता की जांच के साथ मौके पर हुए काम और स्वीकृत कार्य के बीच भी मिलान कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जिन स्थानों पर काम कराया गया, वहां उसकी आवश्यकता और तकनीकी आधार क्या था।
महापौर ने लगाए आर्थिक अनियमितता के आरोप
महापौर ने करीब 7 करोड़ रुपए के इस काम को लेकर आर्थिक अनियमितता के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल महापौर की ओर से उठाए गए सवालों का केंद्र डामरीकरण की जरूरत, काम की गुणवत्ता और सरकारी राशि के उपयोग को लेकर है।
अब मांग इस बात की है कि संबंधित विभाग पूरे काम का तकनीकी और प्रशासनिक परीक्षण कराए। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क पर डामर बिछाने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया था और बारिश के बाद सड़क की परत खराब होने के पीछे वास्तविक कारण क्या रहे। महापौर ने कहा है कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

