जब नेता नहीं, समाजसेवी बने सीएम मोहन, बेटे की शादी सामूहिक समारोह में कराकर जीत लिया सब का दिल!

Sunday, Nov 30, 2025-08:57 PM (IST)

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में रविवार को एक ऐसा अनोखा दृश्य देखने को मिला जिसने राजनीति, समाज और परंपरा—तीनों को एक नई दिशा दी। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने बेटे अभिमन्यु यादव की शादी किसी आलीशान होटल या बड़े रिसॉर्ट में न कराकर सामूहिक विवाह सम्मेलन में करवाई। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के बेटे के साथ 21 अन्य जोड़े भी विवाह बंधन में बंधे। सरकारी कामकाज की व्यस्तताओं के बीच ऐसी सादगी और सामाजिक समानता का संदेश देने वाला यह कदम न सिर्फ चर्चा में रहा, बल्कि लोगों ने इसे “एक मिसाल” के रूप में देखा।

PunjabKesariकैसा रहा समारोह?

उज्जैन के सांवराखेड़ी क्षेत्र में आयोजित सामूहिक विवाह में बारात पारंपरिक अंदाज में निकली। दूल्हे घोड़ों पर सवार हुए और दुल्हनों ने सजी हुई पालकियों में प्रवेश किया।
सीएम के बेटे की शादी भी बिल्कुल उसी पंक्ति में, उसी मंच पर, और उन्हीं परंपराओं के साथ हुई, जैसे अन्य 21 जोड़ों की। कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र में स्पष्ट लिखा था—
“उपहार लाने की कोई आवश्यकता नहीं, आपका आशीर्वाद ही पर्याप्त है।”
इस संदेश ने समारोह को और भी खास बना दिया।

अतिथियों ने क्या कहा?

समारोह में शामिल प्रमुख अतिथियों ने सीएम के कदम की खुले दिल से सराहना की:

PunjabKesariराज्यपाल मंगूभाई पटेल

उन्होंने इसे “सामाजिक समरसता और सरलता का अद्भुत उदाहरण” बताया। कहा कि ऐसी पहलें समाज में समानता का भाव मजबूत करती हैं।

बाबा रामदेव

योगगुरु ने कहा—
“नेताओं को इस तरह के उदाहरण पेश करने चाहिए। इससे समाज में दिखावा कम होगा और संस्कृति मजबूत होगी।” उन्होंने मंत्रोच्चार के साथ नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद भी दिया।

धीरेंद्र शास्त्री (बागेश्वर धाम)

उन्होंने कहा—

“जब एक मुख्यमंत्री अपने बेटे की शादी समाज के बीच, सामूहिक रूप में करता है, तो यह सिर्फ विवाह नहीं, बल्कि संस्कारों का संदेश है।”

इस दौरान सिंधिया सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति सभी ने एक स्वर में कहा कि यह आयोजन आने वाली पीढ़ी को सादगी, संस्कार और समानता का संदेश देता है।

PunjabKesariक्यों खास है यह फैसला?

ऐसे समय में जब शादी समारोह दिखावे और अत्यधिक खर्च के प्रतीक बन चुके हैं, एक बड़े पद पर बैठा परिवार यदि सादगी अपनाए, तो यह लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि “शादी पर अनावश्यक खर्च संस्कृति का हिस्सा नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव है, जिसे बदलना होगा।”

22 परिवार एक ही मंच पर, एक ही व्यवस्था में, बिना भेदभाव—यह अपने आप में सामाजिक समानता का सबसे सुंदर दृश्य था।

कुल मिलाकर मोहन यादव ने अपने बेटे की शादी को साधारण न बनाकर असाधारण संदेश दिया है, यह आयोजन दिखाता है कि मुख्यमंत्री होना एक पद है—
लेकिन “मोहन होना”, यानी विनम्रता, सादगी और सामाजिक जिम्मेदारी निभाना, वाकई मुश्किल है।


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Content Editor

Himansh sharma

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