कट गए हजारों राशनकार्ड धारकों के नाम, खाद्य विभाग के दफ्तरों में लगा रहे चक्कर, जानें वजह
Thursday, Jan 08, 2026-06:02 PM (IST)
दुर्ग (हेमंत पाल) : दुर्ग जिले समेत प्रदेश के कई इलाकों में इन दिनों राशन कार्डधारक परेशान नजर आ रहे हैं। खाद्य विभाग के कार्यालयों और जनपद स्तर के केंद्रों में ऐसे हितग्राहियों की भारी भीड़ देखी जा रही है, जिनके नाम राशन कार्ड से हटा दिए गए हैं। अधिकांश लोगों को यह जानकारी तब मिली, जब उन्हें पिछले माह का राशन नहीं मिला और पूछताछ करने पर नाम कटने की बात सामने आई।
खाद्य विभाग के अनुसार राशन कार्ड से नाम हटने के पीछे प्रमुख कारण आधार और ई-केवाईसी अपडेट न होना है। इसके अलावा परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु, लंबे समय से दूसरे शहरों में पलायन कर जाना, अथवा पात्रता शर्तों में बदलाव भी नाम कटने की वजह बने हैं। कई हितग्राहियों का कहना है कि यदि परिवार के किसी एक सदस्य की भी ई-केवाईसी अपडेट नहीं है, तो पूरे परिवार को राशन से वंचित कर दिया जा रहा है, जिससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

इस पूरे मामले पर जिला खाद्य नियंत्रक अधिकारी अनुराग भदौरिया ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि सत्यापन अभियान के दौरान किसी भी प्रकार के फर्जी राशन कार्ड नहीं पाए गए हैं। नाम काटे जाने का कारण पूरी तरह पात्रता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि जिन हितग्राहियों की ई-केवाईसी लंबित थी, जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जो स्थायी रूप से पलायन कर चुके हैं, या जिनकी वार्षिक आय 6 लाख रुपये से अधिक है, अथवा जिनका जीएसटी टर्नओवर 25 लाख रुपये से ऊपर है, उन्हें योजना से बाहर किया गया है।
खाद्य विभाग का कहना है कि यदि किसी हितग्राही को लगता है कि वह पात्र है और गलती से उसका नाम हटा दिया गया है, तो वह आवश्यक दस्तावेजों के साथ ई-केवाईसी अपडेट कराकर दोबारा खाद्यान्न योजना का लाभ ले सकता है। इसके लिए उचित मूल्य दुकानों, खाद्य कार्यालयों और निर्धारित केंद्रों पर सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
जिला प्रशासन द्वारा उचित मूल्य दुकानों, सार्वजनिक सूचना बोर्डों और समाचार पत्रों के माध्यम से लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है कि वे समय रहते आधार और ई-केवाईसी अपडेट कराएं, ताकि वास्तविक और पात्र हितग्राहियों को बिना किसी बाधा के शासन की योजनाओं का लाभ मिल सके। फिलहाल राशन कार्ड से नाम कटने का मुद्दा जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और बड़ी संख्या में लोग समाधान की उम्मीद में खाद्य विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।

