मनमाने अतिक्रमण सर्वे पर कार्रवाई: नगर परिषद के 3 अधिकारी कर्मचारी निलंबित
Tuesday, Jul 21, 2026-09:07 PM (IST)
रायसेन (शिवलाल यादव) : विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी सांची में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से पहले किए गए सर्वे में कथित अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए नगर परिषद प्रशासन ने तीन अधिकारी-कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन पर आरोप है कि उन्होंने दुकानों वार्डों और अन्य स्थानों का सर्वे मनमाने तरीके से किया।जिससे व्यापारियों और वार्डवासियों में भारी नाराजगी फैल गई। मामले ने सोमवार को नगर परिषद परिसर में हंगामे का रूप ले लिया। जिसके बाद नप परिषद प्रशासन ने सख्त कदम उठाया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शासन के निर्देश पर सांची नगर में सड़कों और दुकानों के सामने किए गए अतिक्रमण को हटाने की तैयारी चल रही थी। इसके लिए नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) रामलाल कुशवाहा ने सर्वे कराने की जिम्मेदारी एआरआई रमेश शर्मा, एआरआई सुशील त्रिवेदी तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी धनीराम सेन को सौंपी थी। इस मामले में आरोप है कि संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों ने सर्वे कार्य में आवश्यक सावधानी और निष्पक्षता नहीं बरती। सर्वे के आधार पर कई व्यापारियों और वार्डवासियों को नोटिस जारी कर दिए गए। जिससे लोगों में असंतोष फैल गया। सोमवार को बड़ी संख्या में व्यापारी, वार्डवासी और उनके परिजन नगर परिषद सांची पहुंचे और सर्वे की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही।
नगर परिषद अध्यक्ष रेवाराम पप्पू अहिरवार का मानना है कि संबंधित कर्मचारियों की कार्यशैली और लापरवाही के कारण परिषद की छवि धूमिल हुई तथा अनावश्यक विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई। इससे पहले सीएमओ रामलाल कुशवाहा द्वारा तीनों कर्मचारियों को कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस जारी किया गया था। हालांकि, उनके द्वारा प्रस्तुत जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर कार्रवाई का निर्णय लिया गया। मंगलवार को सीएमओ रामलाल कुशवाहा ने पत्र क्रमांक 1273/स्था./न.प./2026 दिनांक 21 जुलाई 2026 के माध्यम से मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत एआरआई रमेश शर्मा, एआरआई सुशील त्रिवेदी एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी धनीराम सेन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। जारी आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि में तीनों कर्मचारियों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। साथ ही उन्हें प्रतिदिन निर्धारित स्थान पर अपनी उपस्थिति ई-अटेंडेंस के माध्यम से दर्ज करानी होगी।
नगर परिषद की इस कार्रवाई को प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वहीं, व्यापारियों का कहना है कि सर्वे निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराया जाना चाहिए।ताकि किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय न हो। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अतिक्रमण हटाने की आगामी कार्रवाई किस प्रकार और किन मानकों के आधार पर की जाती है।

