मुसलमान तो मानते हैं कि जिस मंदिर में हिंदू देवता हो वहां उनकी इबादत स्वीकार नहीं होती- रामेश्वर शर्मा
Thursday, Jan 22, 2026-08:53 PM (IST)
भोपाल : मध्यप्रदेश में धार स्थित भोजशाला में हिंदू पूजा और जुम्मे की नमाज एक साथ होगी। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके बाद भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि भारत के सनातनियों की यह मांग पहले भी थी, आज भी है और आगे भी बनी रहेगी कि जहां बागेश्वरी देवी विराजमान हैं, उस स्थल पर पूजा की अनुमति दी जाए। रामेश्वर शर्मा ने कहा कि मुसलमान यह मानते हैं कि जिस स्थान पर भगवान विराजमान हों, वहां उनकी इबादत स्वीकार नहीं होती। ऐसे में मुसलमानों को भी यह समझना चाहिए और राजनीति से प्रेरित होकर नहीं, बल्कि समझदारी से हिंदुओं के साथ सद्भावना रखते हुए भोजशाला में पूजन करने देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भोजशाला राजा भोज द्वारा निर्मित भूमि पर स्थित है और राजा भोज ने वहां मां सरस्वती का मंदिर बनवाया था। मां सरस्वती विद्या की देवी हैं और उनकी आरती-पूजा सभी को करने देना चाहिए। अनावश्यक विवाद खड़ा नहीं किया जाना चाहिए। विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय से बार-बार प्रार्थना की जाएगी और लोकतंत्र की चौखट पर भी तथा न्यायालय की चौखट पर भी निरंतर आग्रह किया जाएगा कि मां जगत जननी देवी सरस्वती की निरंतर पूजा-अर्चना की अनुमति दी जाए।
ये है पूरा मामला
मध्य प्रदेश के धार भोजशाला हिंदू-मुस्लिम दोनों ही अपना पूजा स्थल बता रहे हैं। इस बार संयोग से बसंत पंचमी और जुम्मे की नमाज एक साथ आई है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने मामले में आदेश जारी किए हैं। आदेश के मुताबिक भोजशाला में पूजा और नमाज की इजाजत दी है। निर्देशों के मुताबिक दोनों पक्षों की पूजा-इबादत के समय को लेकर स्पष्ट समय-सारणी तय की गई है। जिसमें स्थानीय प्रशासन को इन निर्देशों का सख्ती से पालन कराने के आदेश दिए गए हैं।
सूर्योदय से दोपहर 12 बजे तक बसंत पंचमी पूजा, दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज होगी
दरअसल इंदौर हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार, भोजशाला परिसर में सुबह, सूर्योदय से दोपहर 12 बजे तक बसंत पंचमी पूजा की अनुमति दी जाएगी। इसके बाद दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज अदा करवाई जाएगी। वहीं, दोपहर 3 बजे के बाद सूर्यास्त तक फिर से पूजा की अनुमति रहेगी।

