आज भी एडवोकेट अनिल मिश्रा को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, इस अहम वजह से नहीं हो पाया जमानत पर फैसला
Sunday, Jan 04, 2026-05:53 PM (IST)
ग्वालियर (अंकुर जैन): ग्वालियर में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के पोस्टर को जलाने के मामले में आरोपी वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा को फिलहाल हाईकोर्ट से राहत नहीं मिल सकी है। रविवार को हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में विशेष बेंच ने इस मामले में सुनवाई की, लेकिन जमानत पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया।
मुख्य न्यायाधीश की अनुमति के बाद रविवार को हुई सुनवाई
मजिस्ट्रेट कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद आरोपी पक्ष ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। मुख्य न्यायाधीश की अनुमति के बाद रविवार को विशेष बेंच का गठन किया गया, जहां सुनवाई के दौरान प्रक्रिया संबंधी कमी सामने आई।
जमानत याचिका की प्रति फरियादी पक्ष को उपलब्ध न कराने की बात
बता दें यह मामला अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम यानी एट्रोसिटी एक्ट से जुड़ा हुआ है। कानून के तहत जमानत याचिका की प्रति फरियादी पक्ष को देना अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में फरियादी मकरंद बौद्ध या उनके परिवार के किसी वयस्क सदस्य को याचिका की कॉपी उपलब्ध नहीं कराई गई थी।
आरोपी पक्ष को 24 घंटे के भीतर फरियादी पक्ष को याचिका प्रति उपलब्ध कराने के निर्देश
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने आरोपी पक्ष को 24 घंटे के भीतर फरियादी पक्ष को याचिका की प्रति उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले में सोमवार को दोबारा सुनवाई की जाएगी। दरअसल रविवार को हाईकोर्ट की विशेष बेंच में जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस आशीष श्रोती ने मामले की सुनवाई की लेकिन फरियादी पक्षकार के हाईकोर्ट में उपस्थित नहीं होने के कारण कोर्ट ने अगली सुनवाई सोमवार को तय की है
आरोपी पक्ष के वकील का पुलिस प्रशासन पर पक्षपात के आरोप
वहीं आरोपी पक्ष के वकील ने पुलिस प्रशासन पर पक्षपात के आरोप लगाते हुए कहा है कि फरियादी स्वयं एक अन्य मामले में फरार है, इसके बावजूद उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजरें सोमवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
दरअसल, गुरुवार रात डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र को जलाने और अपमानजनक नारे लगाने के आरोप में एडवोकेट अनिल मिश्रा समेत सात लोगों के खिलाफ साइबर सेल थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।

