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दांत के डॉक्टर को सिविल सर्जन बनाए जाने पर बवाल, 20 डॉक्टरों ने दिया इस्तीफा

Sunday, Dec 13, 2020-02:10 PM (IST)

शहडोल(अजय नामदेव): शहडोल संभाग के सबसे बड़े जिला अस्पताल  कुशा भाऊ ठाकरे में नवजात बच्चों की मौत का सिलसिला अभी थमा नहीं था कि दांत के डॉक्टर को सिविल सर्जन बनाए जाने के विरोध में 20 डॉक्टर उतर चुके हैं। 20 डॉक्टरों  ने दंत चिकित्सक डॉ. जी. एस. परिहार को सिविल सर्जन बनाये जाने के विरोध में सामूहिक रूप से इस्तीफे की पेशकस की है। ऐसे में जिला चिकित्सालय की पूरी व्यवस्था लडख़ड़ा कर गिरने की स्थिति में हैं।

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आपको बता दें जिला अस्पताल में SNCU व PICU में लगातार ही रही बच्चों के मौत के मामले में शहडोल दौरे पर आए स्वास्थ्य मंत्री ने CMHO डॉ राजेश पांडेय व CS डॉ बीएस बरिया को हटा दिया था। जिसके बाद शासन स्तर पर डॉ मेघा सिंह CMHO व दंत चिकित्सक डॉ जी. एस परिहार को CS बनाया गया है। CS ( सिविल सर्जन) डॉ जी. एस परिहार को बनाए जाने पर जिला चिकित्सालय के सभी डॉक्टर्स विरोध करते हुए इस्तीफा की पेशकस की है। 

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जिला चिकित्सालय में पदस्थ लगभग 20 चिकित्सकों ने दंत चिकित्सक डॉ. जी. एस. परिहार को सिविल सर्जन बनाये जाने के विरोध में सामूहिक रूप से इस्तीफे की पेशकस की है।  जिससे चिकित्सालय की पूरी व्यवस्था लडख़ड़ा कर गिरने की स्थिति में हैं। चिकित्सकों ने मुख्य मंत्री व प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश शासन को भेजे पत्र में यह उल्लेख किया है कि डॉ. परिहार एक तो दंत चिकित्सक हैं, दूसरा वरिष्ठता के आधार पर उन्हें पद नहीं दिया जाना चाहिए।

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जिला चिकित्सालय के अन्य वरिष्ठ चिकित्सक किस तरह एक दंत चिकित्सक के अधीन रहकर कार्य करेंगे। इस बात को लेकर चिकित्सकों ने पत्र में लिखा कि वे सभी असहज महसूस कर रहे हैं, इस कारण वह अपने पदों से इस्तीफा दे रहे हैं। सिविल सर्जन और सीएमएचओ को क्लीन चिट देने के बाद जब उन्हें पद से हटाया गया, इस घटना क्रम के साथ ही शासन की घोषणा से पहले ही डॉक्टर परिहार के सिविल सर्जन बनने की खबरें आम हो चुकी थी।

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बहरहाल खबर है कि संभागायुक्त नरेश पाल जिला चिकित्सालय पहुंच चुके हैं और उन्होंने चिकित्सकों से बैठक भी ली, लेकिन अभी तक चिकित्सक अपने मांगों पर अड़े हैं, यदि यही स्थिति बनी रही और चिकित्सक काम पर नहीं लौटे तो, अस्पताल की व्यवस्था लडख़ड़ा सकती है। वही इस मामले में शहडोल कलेक्टर सत्येंद्र सिंह ने डॉक्टर्स के इस्तीफा देने से इंकार किया है।  जबकि लिखित आवेदन के साथ अपने बयान पर डॉक्टर्स ने इस्तीफा देने की बात कही है। वे इस्तीफे की बात पर अडिग है।

 


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meena

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