फैशन डिजाइनर के पैशों पर ऐश करते थे AIG राजेश, करोड़ों की ठगी और यौन शोषण के आरोप! होगा बड़ा एक्शन

Tuesday, Feb 10, 2026-08:14 PM (IST)

भोपाल: मध्य प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और एडीशनल इंस्पेक्टर जनरल (AIG) राजेश मिश्रा एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। एक महिला द्वारा लगाए गए ठगी, मानसिक-शारीरिक उत्पीड़न और आर्थिक शोषण के गंभीर आरोपों ने पूरे सिस्टम को झकझोर कर रख दिया है। मामला इतना संवेदनशील और चर्चित हो गया है कि 2025 के सबसे विवादित मामलों में इसे शामिल किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल मामले की रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय द्वारा गृह विभाग को सौंप दी गई है। अब यह मामला सीधे प्रदेश के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री डॉ. मोहन यादव के पाले में है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस केस में कोई बड़ा प्रशासनिक या कानूनी फैसला सामने आ सकता है।

क्या है पूरे मामला?
महिला का दावा है कि फरवरी 2025 में एक शादी समारोह के दौरान उसकी मुलाकात AIG राजेश मिश्रा से हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। महिला के अनुसार, मिश्रा ने पहले उसे अपने फैशन बुटीक और बिजनेस में साझेदारी का लालच दिया और फिर धीरे-धीरे आर्थिक और मानसिक शोषण शुरू कर दिया। महिला ने आरोप लगाया है कि मिश्रा ने उसके पैसों से महंगे होटल, शॉपिंग और यात्राओं पर लाखों रुपये खर्च कराए। एक होटल में साथ ठहरने के दौरान एक लाख रुपये किराया भी महिला से दिलवाया। जयपुर में महिला के पैसों से तीन लाख रुपये के कपड़े खरीदे, जो मिश्रा ने अपने परिवार के लिए लिए। इसके अलावा 27 लाख रुपये की डायमंड ज्वेलरी भी महिला के पैसों से खरीदी गई महिला का दावा है कि मिश्रा ने बाद में संपर्क तोड़ लिया और पैसे लौटाने से इनकार कर दिया।

पति-पत्नी बनकर किया हवन!
मामले में सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि राजेश मिश्रा और महिला ने नलखेड़ा स्थित बगलामुखी मंदिर में खुद को पति-पत्नी बताकर हवन कराया। महिला का कहना है कि इससे उसे भावनात्मक रूप से और ज्यादा बांधकर रखा गया। पीड़िता का आरोप है कि 6 अक्टूबर के बाद मिश्रा ने अचानक फोन उठाना बंद कर दिया, संपर्क खत्म कर दिया और फिर मामला पुलिस तक पहुंच गया।

पहले भी रहे हैं विवादों में
यह पहली बार नहीं है जब AIG राजेश मिश्रा विवादों में आए हों। इससे पहले भी धोखाधड़ी और उत्पीड़न से जुड़े आरोपों को लेकर उनकी भूमिका पर सवाल उठ चुके हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जनवरी 2026 में उन्हें डीआईजी पद से हटाकर पीटीएस-III में पदस्थ किया गया था।

अब आगे क्या?
मामले में गृह विभाग के पास रिपोर्ट पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री स्तर पर मंथन की तैयारी है। केस में विभागीय कार्रवाई, निलंबन या एफआईआर जैसे बड़े कदम संभव हैं। पूरे प्रदेश की निगाहें अब सरकार के फैसले पर टिकी हैं। यह मामला न सिर्फ एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की साख पर सवाल खड़े करता है, बल्कि सिस्टम में जवाबदेही और पारदर्शिता की भी बड़ी परीक्षा बन चुका है।


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Content Editor

Vikas Tiwari

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