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शिवराज vs मोहन: CM बनने के बाद मोहन यादव के वो बड़े 5 फैसले जिनपर शिवराज ने दिखाए थे तेवर

Monday, Oct 12, 2026-02:58 PM (IST)

भोपाल : मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बीच मतभेदों की चर्चा तेज हो गई है। इस बार विवाद की वजह बने हैं आदिवासी परिवारों के घरों पर चले बुलडोजर। शिवराज सिंह चौहान ने अपनी ही पार्टी की सरकार के दौरान हुई कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने यहां तक कहा कि जिन आदिवासियों के वोट से बीजेपी सत्ता में आई और मोहन यादव मुख्यमंत्री बने, उन्हीं के घर उजाड़ दिए गए। शिवराज और मोहन यादव के बीच टकराव की स्थिति पहली बार पैदा नहीं हुई है। इससे पहले भी कई बार ऐसी स्थिति पैदा हो चुकी है।

सीएम मोहन के वो पांच फैसले जिनपर शिवराज ने एतराज जताया

सीएम मोहन और शिवराज सिंह के बीच मतभेदों की चर्चा केवल आदिवासियों के मुद्दे तक सीमित नहीं है। दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव ने कई ऐसे फैसले लिए, जिन्हें शिवराज सरकार की विरासत से अलग अपनी पहचान बनाने की कोशिश के रूप में देखा गया।

1. भोपाल का BRTS कॉरिडोर हटाने का फैसला

शिवराज सरकार के कार्यकाल में शुरू हुए भोपाल के BRTS कॉरिडोर को हटाने का फैसला मोहन यादव सरकार ने लिया। यह कदम शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से उठाया गया, लेकिन इसे पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों से अलग रुख के तौर पर भी देखा गया।

2. CM राइज स्कूलों का नाम बदला

अप्रैल 2025 में मोहन यादव सरकार ने CM राइज स्कूलों का नाम बदलकर महर्षि सांदीपनि विद्यालय करने का फैसला किया। यह शिवराज सरकार की प्रमुख शिक्षा पहलों में शामिल योजना थी। नाम बदलने के फैसले को भी शिवराज की विरासत से दूरी बनाने के संकेत के रूप में देखा गया।

3. मध्य प्रदेश गान को लेकर अलग-अलग रुख

शिवराज अपने कार्यकाल में मध्य प्रदेश गान को सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्रमुखता देते थे। वहीं, जनवरी 2024 में मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य गान को राष्ट्रगान के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। इस फैसले ने भी दोनों के नजरिए में अंतर की चर्चा को हवा दी।

4. किसानों के मुद्दे पर भी शिवराज ने उठाए सवाल

जुलाई 2026 में मूंग की सरकारी खरीदी को लेकर भी शिवराज सिंह चौहान और मध्य प्रदेश सरकार के बीच मतभेद सामने आए। शिवराज ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर खरीदी की धीमी रफ्तार का मुद्दा उठाया था। उनका तर्क था कि केंद्र से खरीदी की मंजूरी मिलने के बावजूद किसानों की उपज समय पर नहीं खरीदी जा रही है।

5. देवास के खिवनी अभयारण्य क्षेत्र में वन विभाग की कार्रवाई

जून 2025 में देवास जिले के खिवनी अभयारण्य क्षेत्र में वन विभाग ने 50 से ज्यादा आदिवासी परिवारों के मकानों को हटाया था। इसके बाद शिवराज प्रभावित परिवारों को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिलने पहुंचे थे। शिवराज ने अधिकारियों की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए और प्रभावित परिवारों की समस्याएं मुख्यमंत्री के सामने रखीं। इसके बाद सरकार ने सीहोर के तत्कालीन जिला वन अधिकारी मगन सिंह डाबर का तबादला कर दिया और अभयारण्य से जुड़ी प्रस्तावित कार्रवाई पर भी रोक लगाई गई।

अब तक के इन घटनाक्रमों ने दोनों नेताओं के काम करने के तरीकों में अंतर को उजागर किया है। एक तरफ मोहन यादव सरकार वन क्षेत्रों के संरक्षण और अतिक्रमण हटाने पर जोर देती रही, तो दूसरी तरफ शिवराज प्रभावित आदिवासी परिवारों के पक्ष में खड़े नजर आते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शिवराज के हस्तक्षेप से सरकार की कार्यशैली में सुधार होगा, या बार-बार सामने आने वाले ये घटनाक्रम मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व और शिवराज की राजनीतिक विरासत के बीच खिंचाव की चर्चा को और तेज करेंगे?


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Content Writer

meena

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