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आदिवासियों के घर टूटने पर जीतू पटवारी का बड़ा दावा, बोले- मोहन यादव और शिवराज के टकराव की कहानी है ये!

Monday, Oct 12, 2026-11:45 AM (IST)

सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला अब सियासी तूल पकड़ता जा रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर नाराजगी जताने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करने के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मोहन यादव सरकार पर निशाना साधा है। पटवारी ने इस पूरे घटनाक्रम को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच टकराव से जोड़ते हुए कहा कि इसकी कीमत गरीब आदिवासी परिवारों को चुकानी पड़ रही है।

जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि शिवराज सिंह चौहान पहले ही आदिवासी परिवारों के घर नहीं तोड़ने के निर्देश दे चुके थे। इसके बावजूद वन विकास निगम की ओर से की गई कार्रवाई ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पटवारी ने कहा कि यह केवल मकान तोड़े जाने का मामला नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर टकराव की कहानी भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस आदिवासी अधिकारों की लड़ाई जमीन पर लड़ेगी और मोहन यादव सरकार को इस मामले में जवाब देना होगा।

12 मकान तोड़े जाने से बेघर हुए परिवार, फसलें भी नष्ट

दरअसल, सीहोर जिले के कोसमी गांव में रविवार को वन विकास निगम की कार्रवाई के दौरान आदिवासी परिवारों के 12 मकान तोड़ दिए गए। आरोप है कि इस दौरान खेतों में खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचा और कुओं को भर दिया गया। मकान टूटने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

घटना की जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे। इस दौरान महिलाओं ने अपनी परेशानी बताते हुए उनके सामने दुख जाहिर किया। पीड़ित परिवारों की स्थिति देखकर शिवराज ने नाराजगी जताई और अधिकारियों से फोन पर बात कर मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने को कहा।

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शिवराज बोले- दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा

प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचे शिवराज सिंह चौहान ने कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र में अन्याय की हद हो गई है। जिन घरों में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब परिवारों के सामने बेघर होने का संकट है।

शिवराज ने मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से फोन पर चर्चा कर प्रभावित परिवारों के लिए नए मकान बनवाने और स्थायी व्यवस्था होने तक उनके रहने-खाने का इंतजाम करने की मांग की। उन्होंने मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने रखने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात भी कही।

शिवराज ने यह भी सवाल उठाया कि इतनी बड़ी कार्रवाई के दौरान वन विकास निगम और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर क्यों मौजूद नहीं थे। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से भी चर्चा कर पूरे मामले की जानकारी दी।

पहले भी घर नहीं तोड़ने के निर्देश देने का दावा

कोसमी गांव विदिशा लोकसभा क्षेत्र और बुधनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शिवराज सिंह चौहान ने करीब एक साल पहले भी प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा कर आदिवासी परिवारों के मकान नहीं गिराने के निर्देश दिए थे। बताया जाता है कि उस समय उनकी शिकायत के बाद तत्कालीन डीएफओ मगन सिंह डाबर को भी हटाया गया था।

इसके बावजूद रविवार को हुई कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इस बात पर भी चर्चा हो रही है कि जब पहले ही निर्देश दिए गए थे, तो फिर मकान तोड़ने की कार्रवाई किस आधार पर की गई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

कांग्रेस ने सरकार को घेरा, आदिवासी अधिकारों की लड़ाई का ऐलान

जीतू पटवारी ने कहा कि गरीब आदिवासी परिवारों को भाजपा के नेताओं के बीच कथित टकराव का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए। उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की।

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक तरफ शिवराज सिंह चौहान खुद प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर कार्रवाई पर नाराजगी जता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस इसे सरकार के भीतर टकराव से जोड़कर सवाल उठा रही है। अब निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई पर हैं कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कदम उठाने को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।


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Content Editor

Himansh sharma

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